बड़े नोट बंद होने के बाद पैसे के लिए हर तरफ मारामारी है। सबसे खराब स्थित ग्रामीण इलाकों की है। यहां के एटीएम खाली हो गए हैं। तीन दिनों से इसमें पैसा नहीं डाला गया है। ग्रामीणों को दस दस किमी दूर जाकर पैसे का इंतजाम करना पड़ रहा है। हाल यह है कि ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर एटीएम के शटर तक नहीं खुले हैं।
ग्रामीण इलाकों की बैंकों में अपने ग्राहकों को एटीएम मशीन से एक सप्ताह बाद भी राहत नहीं दे सकी है। बैंकों में लगे एटीएम सुबह चालू होने के कुछ समय में ही बंद हो गए जबकि सुबेहा कस्बे की बैंक समेत कई एटीएम आज तक चालू ही नहीं किए जा सके है।
जिले के ज्यादातर कस्बे में मौजूद बैंक एसबीआई, बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, सेट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक समेत निजी क्षेत्र एचडीएफसी व आईसीआईसीआई बैंक ने कस्बे में एटीएम लगा रखा है।
मगर, सभी बैंकों के एटीएम ने ग्राहकाें को धोखा दिया। मंगलवार को हैदरगढ़ के एचडीएफसी बैंक के एटीएम में लगे रहे भारी संख्या में ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा है। इनमें कोई दस किमी दूर से आया था तो कोई 4 किमी दूर से। सुबह दस बजे के बाद खोले गए एटीएम मशीनों के शटर कुछ समय में गिरा दिए गए है।
दोपहर डेढ़ बजे तक कस्बे में कोई भी एटीएम मशीन काम करते हुए नहीं मिली है। फतेहपुर व रामसनेहीघाट, रामनगर कस्बों में एक दर्जन से भी अधिक बैंकों के एटीएम के शटर तक नहीं खुल सके है। सुबेहा तिराहे पर बैंक आफ इंडिया, लखनऊ मार्ग पर एसबीआई, आईसीआईसीआई, बैंक आफ इंडिया, सिंडीकेट, युनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, विजया बैंक तथा बाराबंकी मार्ग पर पंजाब नेशनल बैंक व रायबरेली मार्ग पर इलाहाबाद बैंक के समीप एटीएम बीते छह दिन से बंद हैं।
बीजाुपर के सेवानिवृत्त शाखा डाकपाल बद्रीविशाल सिंह ने कहा कि डाकघर पर करेंसी नहीं होने से किसानों व आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। कई किमी दूर से त्रिवेदीगंज कस्बे में पहुंच कर सुबह से एचडीएफसी के एटीएम में लाइन में लगे रहे, लेकिन कुछ समय बाद ही मशीन से रुपया निकलना बंद हो गया है।
विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें लखनऊ इलाज के लिए जाना है, लेकिन पैसा न निकलने से अब कल जाना पड़ेगा।
नोट बंदी का व्यापक असर परिवहन विभाग पर पड़ रहा है। यात्रियों के पास छुट्टा पैसे न होने के कारण काफी दिक्ततें हो रही हैं। छुट्टे पैसे के लिए अक्सर यात्रियों व परिचालकों के बीच कहासुनी व मारपीट की घटनाएं भी आम हो गई हैं। सूत्रों की मुताबिक विभाग को रोजाना दो से ढाई लाख रुपये का नुकसान नोटबंदी के कारण हो रहा है।
जिले में परिवहन निगम की 123 बसों के संचालन पर 9 लाख रुपये प्रतिदिन का कलेक्शन करने का लक्ष्य निर्धारित है। केंद्र सरकार द्वारा 500-1000 के पुराने नोट बंद किए जाने से विभाग को रोजाना दो से ढाई लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार द्वारा इस सेवा में 500-1000 रुपये की नोट लेने की बाध्यता का फायदा यात्री उठाते हुए टिकट लेने के लिए जानबूझ कर बंद नोट देने लगे।
परिचालकों के पास छुट्टा पैसे न होने पर जहां यात्रियों के आक्रोश का शिकार होना पड़ रहा है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले डिपो 9 लाख का लक्ष्य पूरा कर एक व डेढ़ लाख रुपये का अतिरिक्त कलेक्शन कर विभाग की आमदनी में इजाफा कर रहा था, जो अब नुकसान में जा रहा है।
मंगलवार दोपहर आरएम की सूचना आई की 500-1000 के नोट आईसीआईसीआई बैंक ने मंगलवार दोपहर तक ही डिपो में आए बंद नोट जमा करेगा उसके बाद उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। आदेश मिलते ही इसकी एक प्रति नोटिस बोर्ड पर चस्पा हो गई। जैसी ही नोटिस बोर्ड पर परिचालकों की नजर पड़ी तक हड़कंप मच गया।