रामसनेहीघाट। सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। बीते सप्ताह सीएमओ की चेतावनी की चेतावनी भी बेअसर रही। उसके पहले राज्य महिला आयोग की सदस्य अंजू प्रजापति भी निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं को देख नाराज हुई थीं। यहां सात चिकित्सकों की तैनाती है लेकिन बुधवार सुबह ओपीडी में अधिकांश कक्षों में कुर्सियां खाली मिलीं। परचा काउंटर भी बंद मिला। सीएचसी के अलावा दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल मिलीं।
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केस 1- सीएचसी रामसनेहीघाट।
समय- सुबह 09:10 बजे।
कहने को इस स्वास्थ्य केंद्र पर सात डॉक्टरों की भारी-भरकम फौज तैनात है लेकिन मौके पर एक भी मौजूद नहीं मिला। परचा बनाने वाला कर्मचारी अपनी सीट से गायब था, जिससे काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहा। सीएचसी में इलाज की आस लेकर आए सुरेश वर्मा, दिनेश कुमार, अमरीश और अजय सहित लगभग दो दर्जन मरीज इधर-उधर भटकते मिले। सीएचसी अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र भी नहीं मिले।
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केस 2- पीएचसी भीखरपुर ।
समय- सुबह 09:45 बजे।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पड़ताल के दौरान सिर्फ सीएचओ अनामिका ड्यूटी पर मिलीं। फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों की कुर्सियां खाली थीं। पूछने पर सीएचओ ने बताया कि बाकी लोग आते ही होंगे।
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केस 3- पीएचसी पठकनपुरवा ।
समय- सुबह 10:05 बजे
यहां डॉक्टर नहीं मिले। फार्मासिस्ट की कुर्सी पर अस्पताल का कर्मचारी नहीं बल्कि एक बाहरी व्यक्ति बैठकर मरीजों को दवाइयां बांट रहा था। मौके पर सिर्फ एक एएनएम मिलीं। राशि, धर्मेंद्र यादव और सुमन डॉक्टर के आने के इंतजार में बैठे मिले।
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अब कार्रवाई की जाएगी
सीएचसी ही नहीं, पीएचसी के हालात भी सुधरेंगे। हमारा प्रयास है कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं नजदीकी सरकारी अस्पतालों में मिले तो समय के साथ पैसे की बचत होगी। अब चेतावनी नहीं, सीधे कार्रवाई की जाएगी।
डा. रंजन गौतम, सीएमओ
पीएचसी भीखरपुर में लटकता ताला।
पीएचसी भीखरपुर में लटकता ताला।