बाराबंकी। गांव की पगडंडियों पर रोज सुबह दौड़ते समय लोग ताने मारते थे...लड़की होकर पुलिस बनेगी। लेकिन पुलिस भर्ती परीक्षा में चयन होने के बाद ट्रेनिंग शुरू होते ही अब यह ताने तारीफ में बदल गए हैं। यह बात पुलिस लाइन में जेडीसी का प्रशिक्षण ले रही आत्मविश्वास से ओतप्रोत रीना ने कही। इस दौरान मौजूद बहराइच से आई कविता ने कहा कि वह गांव की लड़कियों को दिखाना चाहती है कि अगर वह पुलिस में भर्ती हो सकती है तो बाकी क्यों नहीं।
बाराबंकी के पुलिस लाइन में चल रहे प्रशिक्षण सत्र में महिला सशक्तिकरण जमीनी हकीकत में तब्दील होता दिखता है। करीब आधा दर्जन जिलों की 208 बेटियां सिपाही की परीक्षा पास करने के बाद यहां ट्रेनिंग ले रही हैं। इनमें से 95 प्रतिशत बेटियां गांव-गंवई वाले पृष्ठभूमि से आती हैं। शबनम की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। बताया कि पिता किसान हैं, घर की माली हालत अच्छी नहीं। सुबह चार बजे उठकर खेत में मदद करती थी, फिर कोचिंग जाती थी। लोग ताने मारते थे लेकिन मैंने हार नहीं मानी।
सीतापुर नीलम बताती हैं कि सुबह की परेड से लेकर शाम की ड्रिल तक शरीर थक जरूर जाता है, लेकिन दिल को सुकून मिलता है कि एक दिन पापा को आराम दूंगी। अयोध्या की सुषमा ने बताया कि गांव में लड़कियों को शाम ढलते ही घर से निकलने तक नहीं दिया जाता है । अब जब वर्दी पहनकर गश्त करूंगी, तो बाकी लड़कियों को हौसला मिलेगा।
सीओ दीदी दे रही टिप्स
रामनगर की सीओ गरिमा पंत पुलिस लाइन में इन लड़कियों को प्रशिक्षित कर बेहतर पुलिसिंग करने के टिप्स भी दे रही हैं। उन्हें देख कर सिपाही के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कई युवतियों ने तो आईपीएस अथवा पीपीएस बनने के लिए पढ़ाई कर परीक्षा देने की भी ठान ली है।