बाराबंकी। ट्रेनों की टक्कर की आशंका अब इतिहास बनने जा रही है। भारतीय रेलवे ने सीतापुर से बुढ़वल, बुढ़वल से बाराबंकी होते हुए लखनऊ के मल्हौर रेलवे स्टेशन तक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ (4.0 वर्जन) लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 492 करोड़ रुपये का का बजट स्वीकृत किया है। इस परियोजना को पूरा होने में कम से कम दो साल का समय लगेगा। इस पूरे रेलखंड पर ''कवच'' प्रणाली के लिए टावर लगाने हेतु सर्वे कार्य पूरा हो चुका है।
पूर्वोत्तर रेलवे ने पहले इस तकनीक को बाराबंकी से छपरा तक लागू करने की तैयारी की थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर इस बड़े रेलखंड पर स्थापित किया जा रहा है। बुढ़वल रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर मनोरंजन कुमार के अनुसार, स्टेशन परिसर में टावर लगाने के स्थान भी चिन्हित कर लिए गए हैं। सीतापुर से बुढ़वल तक लगभग 100 किलोमीटर लंबे मार्ग सहित बुढ़वल–बाराबंकी और बाराबंकी–मल्हौर रेलखंड का सर्वे भी पूरा कर लिया गया है। ''कवच'' प्रणाली ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाकर दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने में सहायक होगी।
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ऑडियो और वीडियो के माध्यम से मिलेगा अलर्ट
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह बताते हैं कि किसी रेलखंड पर यदि एक ही लाइन पर दो ट्रेनें आमने-सामने या आगे-पीछे चल रही हो, तो कवच प्रणाली स्वयं इमरजेंसी ब्रेक लगा देगी, जिससे टक्कर नहीं होगी। जिस क्षेत्र में दूसरी ट्रेन प्रवेश करती है, उसी झण लोको पायलट को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है। इसके अलावा रेलवे क्रॉसिंग पर सीटी बजना शुरू हो जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका और कम हो जाती है।
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15 साल बाद कवच सबसे विश्वसनीय
वर्ष 2014-15 में एससीआर के 250 किमी लंबे ट्रैक पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सिस्टम लगाने की पहल हुई। वर्ष 2015-16 में ट्रेनों पर पहला परीक्षण हुआ। 2017-18 में कवच विनिर्देशन संस्करण को अंतिम रूप दिया गया। 2018-19 में आईएसए के आधार पर आरडीएसओ द्वारा तीन फर्मों को मंजूरी दी गई। जुलाई 2020 में कवच को राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली घोषित किया गया जबकि जुलाई 2024 में कवच संस्करण 4.0 जारी किया गया।