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बिना संसाधन तीरंदाजी में तमगा हासिलकर रहे जिले के होनहार

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बाराबंकी। कौन कहता है कि आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों...। यह पंक्तियां जिले के तीरंदाजी के क्षेत्र में अपनी किस्मत अजमा रहे खिलाड़ियों पर सटीक बैठती है। बिना संसाधन के जिले के नौनिहाल खिलाड़ी तीरंदाजी के क्षेत्र में अपना डंका स्टेट व नेशनल प्रतियोगिताओं में बजा रहे है। हाल में ही आगरा में हुई आर्चरी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जिले के नौ खिलाड़ियों ने गोल्ड, सिल्वर व ब्रोंज मेडल जीतकर यह साबित कर दिखाया।
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मानसिक एकाग्रता के विकास को लेकर स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का रूझान तीरंदाजी के क्षेत्र में बढ़ रहा है। मगर, जिले के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में आर्चरी खेल को लेकर कोई सरकारी सुविधा नहीं है। छह वर्ष आर्चरी की पौध को तैयार करने के लिए यहां आर्चरी कोच तक नहीं है। यहां के तीरंदाजी के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को लेकर करीब पांच वर्ष पहले तत्कालीन डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने डेढ़ लाख रुपये कीमत वाला रिकर्ब (धनुष) खरीद कर आर्चरी कोच को उपलब्ध कराया गया था।
मगर, यहां से जाते-जाते आर्चरी कोच उसे भी अपने साथ लेकर चले गए। ऐसे में सरकारी सुविधाएं न होने को लेकर कई निजी स्कूलों ने बच्चों को आर्चरी का प्लेटफार्म उपलब्ध कराया। निजी आर्चरी प्रशिक्षक भी रखे। इसके बलबूते पर वर्तमान में करीब सौ से अधिक बच्चे स्कूली शिक्षा के साथ तीरंदाजी के क्षेत्र में अपना भविष्य सवांरने में लगे है। हाल में हुई आगरा में हुई तीरंदाजी प्रतियोगिता में जिले के 16 खिलाड़ियों ने प्रदेश की ओर से प्रतिभाग किया। इसमें नौ खिलाड़ियों ने मेडल हासिल किए। इसमें दो गोल्ड एक सिल्वर व छह को ब्रोंज मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया था।
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आर्चरी ने लौटाई आंखों की रोशनी
बालाजी का बचपन अकादमी की छात्रा अराध्या जैन शहर के कटरा मोहल्ला निवासी आराध्या जैन के पिता कपड़े के व्यापारी है। आराध्या बताती है कि तीरंदाजी के खेल से उनकी वीक हो रही आंखों की रोशनी को लौटा दिया। उसने कहाकि उसे नेशनल प्रतियोगिता में सिल्वर जितने की उतनी खुशी नहीं है। जितना इस खेल से होने वाले लाभ से। मानसिक एकाग्रता के लिए यह खेल विद्यार्थियों में काफी लोकप्रिय हो रहा है।
स्कूल के सपोट से मिला मुकाम
बालाजी का बचपन आकादमी की छात्रा स्मिता तिवारी ने बताया कि शहर के बेगमगंज निवासी स्मिता के पिता भी विजनेश मैन है। उसने बताया कि आर्चरी खेल में टीम की जरूरत नहीं होती। ऐसे में सेल्फ अभ्यास व प्रतिभाग से स्वयं में आत्मविश्वास की भावना पैदा होती है। इस खेल के प्रति उसके रूझान को लेकर उसके स्कूल बालाजी के बचपन से उसे काफी सपोट मिला। जिसकी बदौलत उसने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ब्रोज मेडल हासिल किया।
मानसिक विकास करता है ऑर्चरी का खेल
एम स्वायर के छात्र दिव्यांश ने कहा कि ऑर्चरी के खेल से मानसिक विकास होगा है। मन एकाग्रचित होने से पढ़ाई में पढ़ाई की ओर रूझान बढ़ता है। इसके लिए हमने ही नहीं अन्य विद्यार्थी का रूझान इस खेल की ओर से बढ़ रहा है। तीरंदाजी के क्षेत्र में स्टेट व नेशनल प्रतियोगिताओ में सफलता की ऊंचाईयों पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। पहले प्रयास में ब्रोंज मेडल हासिल कर पाने मात्र से मै संतुष्ट हूं।
अंतराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करेंगे बच्चे
एम स्क्वायर के छात्र आयुष ने बताया कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले आयुष यादव बताते है कि अन्य खेलों की अपेक्षा आर्चरी के खेल का प्रभाव शिक्षा पर नहीं पड़ता। बल्कि इस खेल से पढ़ाई के प्रति बच्चों का मन लगता है। अगर जिले में आर्चरी की सुविधाएं मिले। तो यह के नौनिहाल कम उम्र में राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकते है।
खेल को बढ़ावा देने की बात पर नौनिहालों के रूझान की नहीं कद्र
एम स्क्वायर स्कूल के प्रखर सिंहं ने भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया है। प्रखर कहते है कि सरकार खेल को अर्थव्यस्था से जोड़ने के लिए बढ़ावा दे रही है। मगर, जिले में बच्चों के आर्चरी के प्रति बढ़ते रूझान की कद्र नहीं की जा रही है। अगर स्टेडियम में आर्चरी के खेल की सुविधा मिले तो देश ही विदेश तक बाराबंकी के बच्चे कीर्ति पताका फहराकर जिले का नाम रोशन करेंगे।
सुविधा मिले तो इतिहास रचेंगे जिले के नौनिहाल
जिला क्रीड़ा अधिकारी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल देने वाले बच्चों के कोच गौरव अवस्थी व अर्चिता त्रिवेदी काफी खुश है। उनका कहना है कि वर्तमान में आर्चरी के क्षेत्र में बच्चों का काफी रूझान बढ़ा है। इसको लेकर फील्ड आर्चरी उत्तर प्रदेश की चेयरपर्सन व जिले की निवासी निधि जैन का काफी सहयोग रहा। बच्चों की मेहनत व किए गए अभ्यास से उनकी सफलता ने जिले का नाम रोशन किया है। अगर आर्चरी खेल के सुविधाएं जिले में मुहैय्या कराई जाए तो निश्चित तौर में यहां के नौनिहाल और बेहत्तर कर जिले की कीर्ति पताका विश्वभर में फहराकर इतिहास रचेगें।
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