कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी की कटान में किसानों की जमीन के साथ ही कई स्थानों पर कटान से बचाव के लिए इस्तेमाल हुए संसाधन भी नदी में बह गए है। तटवर्ती गांवों को नदी की कटान से बचाने के लिए कराई गई ड्रेजिंग के बाद निकली बालू व लगाए गए परक्यूपाइन भी नदी के पानी के साथ बह चुके हैं। इससे नदी का पानी घटने के बाद भी तटवर्तीय इलाकों में हो रही कटान किसानों की परेशानी बढ़ा रही है।
अप्रैल, मई व जून माह में करीब आठ करोड़ रुपए खर्च कर सिरौलीगुंग से टेपरा गांव तक करीब तीन किलोमीटर इलाके में ड्रेजिंग का कार्य कराया गया था। इसके अलावा जिले की बाढ़ कार्य खंड द्वारा भी लाखों रुपये खर्च कर कटान से बचाने के लिए परक्यूपाइन (सीमेंट के तिपाए) बोरी में भरकर डाले गए थे। साथ ही मनीराम पुरवा से बीहड़, सिरौलीगुंग, सनावा व कहरान पुरवा गांव तक जिओ बैग व बांस के स्टैंड भी लगाए गए थे। बचाव के लिए बनाए गए स्पर में भी कटान हो रही है।
ग्रामीण श्रीचंद, रामराज, श्रीनिवास व संदीप पांडेय ने बताया कि लाखों रुपये खर्च कर ड्रेजिंग कार्य के लिए जो कवायद हुई थी, उसका भी कोई लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा। कटान से बचाव की जगह लोगों को कटान का दंश झेलना पड़ रहा है। बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि ड्रेजिंग का कार्य मैकेनिकल डिपार्टमेंट का है। क्षतिग्रस्त संसाधनों की मरम्मत कराई जाएगी।