बाराबंकी। देवा रोड स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज में काम करने वाले मजदूर संजू (40) के साथियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में एयर कम्प्रेसर मशीन से हवा भर दी। कुछ ही देर में उसका शरीर फूल गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। घटना के बाद साथी मौके से भाग गए। तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद मंगलवार सुबह लखनऊ के निजी अस्पताल में मजदूर की मौत हो गई। परिजनों ने सहकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया है।
जहांगीराबाद थाना के चंदौली गांव निवासी संजू (40) देवा रोड स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज में मजदूरी करते थे। पुलिस के अनुसार, 17 जुलाई को इंडस्ट्री में काम के दौरान दो-तीन साथियों ने कथित तौर पर मजाक करते हुए एयर कम्प्रेसर मशीन का पाइप उनके प्राइवेट पार्ट में लगा दिया। तेज दबाव से हवा शरीर के अंदर पहुंचने लगी।
देखते ही देखते संजू का शरीर फूल गया और वह बेहोश होकर गिर पड़े। संजू की हालत बिगड़ते देख उनके साथी भाग गए। ठेकेदार ने उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार भोर करीब चार बजे उनकी मौत हो गई। लखनऊ में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। संजू की मौत के बाद परिजनों ने सहकर्मियों पर हत्या के आरोप लगाए हैं।
सीओ सिटी संगम कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। जहांगीराबाद पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद ठेकेदार ने पुलिस को सूचना नहीं दी। उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
हवा से गुब्बारे की तरह फट जाती हैं आंतें
जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डाॅ. संदीप कुमार ने बताया कि एयर कम्प्रेसर मशीन से प्राइवेट पार्ट में हवा भरना अत्यंत घातक होता है। इस तरह के हादसों या मजाक से शरीर के अंदरूनी अंग फटने और आंतरिक रक्तस्राव जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। प्रेशर पंप से निकलने वाली हवा का दबाव बहुत उच्च होता है।
यह हवा शरीर के प्राकृतिक अवरोधों को चीरकर सेकंडों में मलाशय और आंतों में भर जाती है, जिससे आंतें गुब्बारे की तरह फट जाती हैं। अत्यधिक दबाव के कारण पेट के अंदरूनी अंग नष्ट हो जाते हैं। चिकित्सक ने बताया कि इससे पेट फूलने लगता है। गंभीर इंटरनल ब्लीडिंग व सेप्सिस (संक्रमण) से मरीज की मौत भी हो जाती है।
ऐसी कोई घटना घटे तो इसे सामान्य मजाक न समझें। पीड़ित को तुरंत बिना किसी देरी के बड़े सर्जिकल सेंटर ले जाएं, जहां इमरजेंसी लैपरोटॉमी (आसन्न सर्जरी) के जरिये आंतों को ठीक किया जा सके।