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किसानों के किसी काम का नहीं कृषि विज्ञान केंद्र

Sat, 25 Jun 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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कृषि विज्ञान केंद्र - फोटो : अमर उजाला
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कृषि विज्ञान केंद्र पर प्लांट हेल्थ क्लीनिक के लिए आए लाखों रुपये के उपकरण व केमिकल बिना इस्तेमाल हुए बर्बाद हो गए। खरीफ की खेती में जुटे किसानों के लिए शिक्षण प्रशिक्षण जैसी अन्य गतिविधियां भी केंद्र पर नजर नहीं आ रहीं हैं। इस केंद्र से मिट्टी व पौधों की जांच कर किसानों की उन्नतशील खेती का सपना भी साकार होता नजर नहीं आ रहा है।
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तहसील कार्यालय के समीप स्थित कृषि फार्म में डेढ़ दशक पहले नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय ने खेती किसानी में किसानों की सहायता के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की थी। यहां तैनात कृषि विशेषज्ञाें की उदासीनता के चलते किसानों को केंद्र से कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

इसका अंदाजा तीन वर्ष पहले ‘आत्मा योजना’ के तहत केंद्र पर प्लांट हेल्थ क्लीनिक की स्थापना के लिए भेजे उपकरण व केमिकल्स को देख कर लगाया जा सकता है। तत्कालीन डीएम मिनिस्ती एस के निर्देश पर हर्टीकल्चर मिशन से प्रयोगशाला विकसित करने के लिए दस लाख रुपए के उपकरण व केमिकल्स भेजे गए थे।
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प्लांट हेल्थ क्लीनिक में खेत की मिट्टी व पौधों की जांच कर फसल में लगने वाली बीमारी व उनके रोकथाम का उपाय सुझाने के साथ फसल में प्रयोग किए जाने वाले आवश्यक उर्वरकों की जानकारी दी जानी थी। लेकिन केवीके पर आए इन उपकरणों व केमिकल्स को बिना पैकिंग खोले एक कमरे में बंद कर दिया गया।

यही नहीं कुछ माह पहले केमिकल्स व उपकरण के खराब होने की शिकायत पर होने पर केंद्र को भेजी गई डॉ. प्रमिला पांडेय को फौरी तौर पर प्लांट हेल्थ क्लीनिक का इंचार्ज बनाए जाने की घोषणा कर दी। कमरे में बंद केमिकल्स व उपकरणों को अन्यत्र हटा दिया गया है। 

सूत्रों की मानें तो क्लीनिक का जिम्मा संभालने वाली कृषि विशेषज्ञ भी सप्ताह में एक दो दिन ही केंद्र तक पहुंचती है। मृदा व पौध प्रशिक्षण केंद्र में शोध कर किसानों को सटीक जानकारी देने का वैज्ञानिकों का सपना पूरा नहीं हो सका है।

उन्नत खेती के लिए वैज्ञानिकों की शिक्षण प्रशिक्षण व गांवों में विजिट कर किसानों को प्रोत्साहित करने की समस्त गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। कृषि वैज्ञानिक केंद्र पर नियमित पहुंचने वाले कृषि वैज्ञानिक भी पूरा दिन केंद्र पर बिता कर वापस लौट जाते हैं।

इस बारे में किसानाें ने कई बार निदेशक प्रसार को कृषि को अवगत कराया लेकिन केंद्र के विकास से संबधित गतिविधियों से अधिकारी बेफिक्र हैं। इनकी भूमिका औचक निरीक्षण में मात्र उपस्थित रजिस्टर चेक कर विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिकों को हतोत्साहित करने तक सीमित है।

रजिस्टर पर मोमेंट भर कर विजिट पर जाने से मौखिक तौर पर रोक लगाए जाने से वैज्ञानिकों का किसानों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। 

जिला में एक मात्र कृषि विज्ञान केंद्र तहसील हैदरगढ़ में है। इसमें किसानों को वैज्ञानिक विधि से प्रशिक्षण देने व शिविरों का आयोजन करने का इंतजाम किया जाता है। उनके ठहरने की भी व्यवस्था केंद्र पर ही होती है।

लेकिन केंद्र पर किसानों के शिक्षण-प्रशिक्षण व प्रवास के लिए बना किसान भवन की हालत भी काफी जर्जर है। यहां के कमरों में बेड व बिस्तर तक गायब हैं तथा रात में रुकना तो दूर दिन में कुछ समय के लिए भी कमरों में रहना मुश्किल है। साफ सफाई के अभाव में भवन में शौचालय आदि की स्थिति भी बदतर है। 


केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक एसपी सिंह ने इस बारे में कहा प्लांट हेल्थ क्लीनिक के उपकरण व केमिकल्स केंद्र पर इनकी तैनाती से पहले भेजे गए थे। इनके द्वारा विगत वर्षो से प्रयोगशाला को शुरू करने के बारे में वरिष्ठ अधिकरियों से परामर्श किया गया तथा उपकरणों की साफ सफाई आदि करा कर संचालन की जिम्मेदारी विशेषज्ञ डॉक्टर को सौंपी गई है। केंद्र की अन्य गतिविधियों पर रोक के संबंध मेें कार्यक्रम समन्वयक एसपी सिंह ने कहा केंद्र से कृषि वैज्ञानिक गांवों को भेजे जाते हैं।
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