सूरतगंज। इस बार की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बेहद खास और पावन है। पंचांग गणना के अनुसार 70 साल बाद ऐसा दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। इस वर्ष गृहस्थ और संन्यासी दोनों एक ही दिन चार सितंबर (शुक्रवार) को कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि चार सितंबर को सुबह शुरू होकर देर रात तक रहेगी। इसी दिन रात तक रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृष राशि में चंद्रमा की स्थिति बन रही है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय तत्वों का एक साथ मिलना इस पर्व के आध्यात्मिक फल को कई गुना बढ़ा देता है। मोहम्मदपुर खाला श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी कृष्ण चंद्र द्विवेदी और पंडित गेंदलाल शुक्ला के अनुसार इस दुर्लभ योग में कान्हा के पूजन और व्रत से संतान सुख तथा सुख-शांति मिलती है।
इसके साथ ही इस पावन दिन विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान करने पर पितरों के कल्याण और मुक्ति का भी द्वार खुलता है। मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान लल्ला के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक होगा। लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर झूले में विराजमान कराया जाएगा और माखन-मिश्री का भोग लगेगा। मंदिरों में भव्य झांकियां, भजन-कीर्तन, अर्घ्य और आरती के साथ यह महापर्व अपार उत्साह के साथ मनाया जाएगा।