बाराबंकी। छह लेन वाले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर अधिकतर वाहनाें की रफ्तार 100 किमी प्रतिघंटा से भी तेज होती है। चालक बेफ्रिक होकर फर्राटा भरते हैं। इस रफ्तार के बीच अगर कोई वाहन जरा-सी देर के लिए भी अचानक सामने आता जाता है तो यूं समझो मौत का तांडव शुरू। बीते तीन साल के बड़े हादसों ने साफ कर दिया है कि इस एक्सप्रेसवे पर खड़े वाहन का मतलब है मौत। बुधवार को भी पांच मौतों के पीछे यही वजह सामने आई। हमने इसकी पड़ताल की।
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हादसे बता रहे हकीकत
- 25 जुलाई 2022 को लोनीकटरा क्षेत्र में सड़क किनारे खड़ी डबल-डेकर बस में पीछे से तेज रफ्तार बस जा घुसी। आठ लोगों की मौत हुई।
- 31 मार्च 2022 को डंपर के मुड़ते ही तेज रफ्तार कार सीधा उसमें घुस गई। चार लोगों की जान चली गई। ब्रेक लगाने निशान गवाही दे रहे थे।
- 6 अगस्त 2024 की रात अज्ञात वाहन की टक्कर से एक्सप्रेस वे पार करने के चक्कर में दो बाइक पर सवार दो युवकों की मौत हो गई।
- 16 फरवरी 2025 टेम्पो-ट्रैवलर खड़ी में घुस गया जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। बस छत्तीसगढ़ की टेम्पो-ट्रैवलर महाराष्ट्र का था।
- 18 अप्रैल 2025 को हैदरगढ़ इलाके में ट्रक की टक्कर से मैनपुरी निवासी युवक आलोक कुमार और उनकी मंगेतर की मौत हो गई।
- 6 जून 2025 को सुबेहा थाना क्षेत्र में कंटेनर एक्सप्रेसवे पर खड़े वाहन में टकरा गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी।
- 4 अगस्त 2025 को हैदरगढ़ क्षेत्र के एक्सप्रेसवे के 41.09 किलोमीटर पर एक डीसीएम खड़े ट्रक से टकरा गई। दो लोगों की मौत हो गई।
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हादसों का रिकार्ड: 40 दिन में 100 से अधिक मौतें
खेती से लेकर अपने धार्मिक व पर्यटन स्थलों के लिए प्रख्यात बाराबंकी जिला अब प्रदेश में हादसों के लिए कुख्यात होता जा रहा है। शायद न आप यह जानकार चौंक जाएं कि बीते 40 दिन में 100 से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है। अफसोसजनक बात यह है कि 83 मौतें उस नवंबर माह में हुई जिसे यातायात जागरूकता माह कहा जाता है। हादसों का यह आंकड़ा पिछले रिकार्ड तोड़ता नजर आता है। संवाद