जनपद में एक-दो नहीं, छोटी व बड़ी नदियों को मिला कर करीब एक दर्जन नदियां हैं। इनमें से कई नदियां तो अप्रैल में ही सूख गई हैं तो घाघरा व गोमती नदियों का जलस्तर काफी कम हो गया है।
रेठ व कल्याणी नदी में भी पानी नाम मात्र का ही बचा है। कई जगहों पर तो रेठ नदी सूख भी गई है। यह सब नदियाें पर अतिक्रमण के चलते हो रहा है जिससे जिले में पानी का संकट गहराता जा रहा है।
जनपद में नदियों का संजाल बिछा हुआ है। इनमें घाघरा, गोमती, चौका, कल्याणी, संखिनी, रारी, रेठ, जमुनिया, सुमली व ज्योरी नदियां प्रमुख हैं। इसमें से घाघरा, गोमती व चौका नदी को छोड़ अन्य सभी नदियों का उद्गम जिले की किसी न किसी झील से ही है। लेकिन वर्तमान में ज्यादातर छोटी नदियां सूख चुकी हैं। कुछ नदियां तो नाले की शक्ल ले चुकी हैं तो रेठ नहीं भूमाफिया की चपेट में है।
जनपद में कई नदियां सूख रही हैं। कई जगहों पर अतिक्रमण हैं तो कुछ जगहों पर प्रॉपर्टी डीलरों ने कब्जा कर रखा है लेकिन प्रशासन इन पर कार्रवाई करने और उनका अस्तित्व बचाने को गंभीर नहीं है। समाजसेवियों को सहयोग लेकर पिछले दस सालों में ऐसा कोई अभियान नहीं चला जिससे नदियों को बचाने में मदद मिले
जिले की नदियों पर जहां भी अतिक्रमण किया जा रहा है। उसे हटाया जाएगा। जो भी प्रॉपर्टी डीलर इसमें शामिल हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। लोकल नदियों को बचाने के अभियान चलाया जाएगा। - अजय यादव, जिलाधिकारी
जिले में चार प्रमुख घाघरा, कल्याणी, रेठ और गोमती नदियां हैं। इस बार बारिश कम होने की वजह से इनमें पानी काफी कम हो गया। नदियों में पानी छोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेठ नदी को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी नदी पर अवैध कब्जे की जानकारी नहीं है। - वीके यादव, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड