हैदरगढ़ (बाराबंकी)। फसलों सिंचाई के लिए नहरों से पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। सिल्ट से पटी नहरों मेें झाड़ियाें को उगी देख किसानों ने पानी मिलने की आश ही छोड़ दी है। निजी संसाधनों के भरोसे फसलों की प्यास बुझाने के लिए किसान मेहनत कर रहे हैं। नहरों व माइनरों की हालत देखने के बाद यह बात अपने साफ हो जा रही है कि विभाग ने सिल्ट सफाई पर ध्यान नहीं दिया है।
क्षेत्र के खेतों की सिंचाई के लिए शारदा सहायक के 23 डाउन सिस्टम की नहरों का संजाल फैला है। नहरों के रखरखाव का जिम्मा लखनऊ के निर्माण खंड प्रथम को सौंपा गया है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली के चलते बीते कई वर्षों से किसानों को सिंचाई लिए पानी नहीं मिल रहा है। अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं तथा पानी छूटने पर माइनर व नहरों के बीच-बीच में मशीन लगाकर सिल्ट सफाई की औपचारिकता निभाकर धन का बंदरबांट कर लेते हैं। खरीफ फसली सत्र मेें सफाई के नाम पर यह खेल करने वाला विभाग अब रबी फसली सत्र में किसानों को परेशान करने की तैयारी कर रहा है। चार माह पूर्व सिल्ट सफाई में धांधली की शिकायत विधायक राम मगन रावत समेत कई जन प्रतिनिधियों ने की थी। इसके बाद भी किसानों को पानी नहीं मिल सका था। कुल मिलाकर नहरों एवं माइनरों में झाड़ियां उगी हुई है और इनमें सिल्ट भरा हुआ है।