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जमानती मामले में आरोपी को न्यायालय में पेश कर मांगी 14 दिन की रिमांड

Tue, 22 Oct 2013 05:39 AM IST
Barabanki
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बाराबंकी। जमानती और तीन साल तक की सजा के अपराध में आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड की याचना करना एक विवेचक को भारी पड़ गया। एसीजेएम कोर्ट ने एसपी को पत्र लिखकर विवेचक (दरोगा) के खिलाफ पुलिस अधिनियम की धारा-29 के तहत कार्रवाई करने और कृत कार्रवाई से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया है।
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मामला रामनगर थाने का है। थाने में दर्ज अपराध संख्या-402/13 के विवेचक एसआई बृजेश मिश्र के विरुद्ध अदालत ने रविवार को इस आशय का आदेश तब पारित किया जब उनके द्वारा एक आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड की याचना की गई। संबंधित आरोपी भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (धारदार हथियार से चोट पहुंचाने) के मामले में वांछित था। यह अपराध जमानतीय है और इसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। ऐसे अपराध में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे थाने से ही जमानत व मुचलके पर रिहा किया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो विवेचक को पर्याप्त कारण अदालत को बताना होगा। मामले में आरोपी अमरीका (56) को गिरफ्तार कर न्यायालय में न्यायिक रिमांड के लिए रविवार को एसीजेएम हुमायूं रशीद खां (रिमांड मजिस्ट्रेट) की अदालत में पेश कर दिया गया। एसीजेएम ने इस मामले में रिमांड का कोई आधार न पाते हुए रिमांड की याचना खारिज कर दी और आरोपी को हिरासत से तत्काल रिहा कर दिया। एसीजेएम ने पुलिस अधीक्षक को विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए कड़ा पत्र लिखते हुए कहा कि ऐसे मामलों में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित विधि व्यवस्था के निर्देशों का पुलिस द्वारा अनुपालन करना नहीं पाया जा रहा है। संबंधित मामले में आरोपी को बिना किसी विधिक आधार के गिरफ्तार किया जाना और उसको चौदह दिन की रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों का न सिर्फ उल्लंघन है बल्कि पुलिस द्वारा विधि विरुद्ध कार्य किया गया है। अदालत ने मामले के विवेचक बृजेश कुमार मिश्रा के विरुद्ध विधिक दायित्वों का अनुपालन न करने पर पुलिस अधिनियम की धारा-29 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि कृत कार्रवाई से न्यायालय को भी अवगत कराया जाए। अदालत ने आदेश की प्रतिलिपि जिला जज, सीजेएम व जिलाधिकारी को भी भेजी है।
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