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कुपोषण से बचाव की योजनाएं ही ‘कुपोषित’

Thu, 09 May 2013 05:30 AM IST
Barabanki
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बाराबंकी। बच्चों को हॉट कुक योजना से पोषित करने व कुपोषण से बचाने की शासन की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है। भारत सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में बाराबंकी का कुपोषण के मामले में प्रदेश मेें नौ नंबर पर होना बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पुष्टाहार वितरण की कहानी बयां कर रहा है। दो रुपये 25 पैसे के औसत से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषक आहार देकर पोषित किया जा रहा है। ये व्यवस्था आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित है। कार्यकर्त्री को इसी धनराशि में से ईंधन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस धनराशि में बच्चों को किस हद तक गुणवत्तापूर्ण पोषक आहार दिया जा सकता है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोषित आहार देने के लिए हॉट कुक योजना चलाई जा रही है। जिसमें तीन से छह साल तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए गुणवत्तापूर्ण पोषक आहार दिए जाने की व्यवस्था है। इसमें बच्चों को मूंग की दाल की खिचड़ी व दलिया देने की व्यवस्था है। इसके लिए कार्यकर्त्रियों को कनवर्जन कॉस्ट दी जाती है। मगर ये कनवर्जन कॉस्ट इतनी कम है कि उसमें बच्चे को पूर्ण पोषक आहार दे पाना संभव नहीं है। शासन द्वारा दो रुपये 25 पैसे प्रति बच्चा कनवर्जन कॉस्ट दी जाती है। इसी पैसे में कार्यकर्त्री पर राशन खरीदने व ईंधन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर तमाम आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लगा रहता है, कार्यकर्त्रियों पर धांधली के भी आरोप लगते रहते हैं। ऐसे में बच्चों को पोषक आहार मिलने की ही कोई गारंटी नहीं है। जो मिलता भी है वो अपर्याप्त और घटिया होता है। यही वजह है कि पोषित आहार देने के बाद भी बच्चों को कुपोषण से बचाया नहीं जा सका है। विभागीय जानकारी के अनुसार देश के अति कुपोषित जिले की सूची में बाराबंकी को भी शामिल किया गया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को भेजी गई सूची में देश में बाराबंकी को 97वें स्थान पर रखा गया जबकि प्रदेश में ये जिला नौ नंबर पर है। इसकी वजह कुपोषण से बचाव की योजना का ही कुपोषित होना है।
वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी शारदा यादव का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों में बच्चों को पूर्ण पोषक आहार दिया जा रहा है। कोेशिश रहती है कि बच्चों को नियमित पोषाहार मिले।
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