बाराबंकी। 77 हजार 135 बच्चों में कुपोषण के चलते उम्र के हिसाब से लंबाई और वजन कम पाया गया है। इन बच्चों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, फिर भी यह संख्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। इनमें से आठ बच्चों के गंभीर कुपोषित पाए जाने पर जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में चल रहा है। अन्य बच्चों की निगरानी संबंधित स्वास्थ्य केंद्र एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कराई जा रही है। इनको आवश्यक दवाओं के साथ पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए उनकी उम्र व लंबाई के आधार पर परीक्षण कराया जाता है। उम्र के अनुसार कम वजन वाले बच्चों को कुपोषित व अतिकुपोषित श्रेणी में रखा गया है, जबकि उम्र के अनुसार कुपोषित मिलने वाले बच्चों से मैम व सैम श्रेणी में रखा गया है। इनमें सबसे गंभीर कुपोषित बच्चों को सैम श्रेणी में रखा गया है। 43078 बच्चे कुपोषित, 17076 बच्चे अति कुपोषित, 12157 बच्चे मैम व 4824 बच्चे सैम श्रेणी में हैं।
वर्तमान में आठ गंभीर कुपोषित बच्चों का इलाज जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में चल रहा है। यहां उन्हें चिकित्सक की सलाह पर विटामिन की दवाएं दी जाती हैं। साथ ही बच्चों व उनकी मां को निशुल्क आहार, बच्चों को लाने व छोड़ने की निशुल्क सेवा, मां को 50 रुपये दैनिक भत्ता इत्यादि सुविधाएं दी जा रही हैं। यहां 10 से 14 दिनों तक इलाज चलने के बाद वजन बढ़ने के बाद डिस्चार्ज होते हैं, फिर आंगनबाड़ी सहायिकाएं इनकी नियमित निगरानी करती हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों को अन्य कुपोषित बच्चों से अधिक खाद्य तेल, दलिया, चावल व दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही दुधारू गाय, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, जॉब कार्ड जैसी अन्य सुविधाएं भी परिवार को मिलती हैं।
बॉक्स
ब्लॉकवार कुपोषित, अति कुपोषित, मैम व सैम बच्च निंदूरा- 4088- 2123- 1436- 693
दरियाबाद- 2315-807- 927-467
पूरेडलई- 1821- 797- 527- 372
बनीकोडर- 3025- 1426- 11115- 461
सिरौलीगौसपुर- 3613- 1591- 1089- 399
सिद्घौर- 3317- 1053- 829- 352
फतेहपुर- 3587- 1489- 921- 363
देवा- 2609- 990- 816- 272
हरख- 2322- 901- 588- 214
बंकी- 3030- 1029- 812- 278
हैदरगढ़- 2380- 861- 649- 213
त्रिवेदीगंज- 2472- 998- 698- 176
रामनगर- 2884- 1116- 569- 218
मसौली- 2910- 979- 525- 142
सूरतगंज- 2097- 721- 570- 151
शहर-578- 195- 184- 53
गंभीर कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी की जाती है एवं पोषण के लिए दुधारू गाय व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अति गंभीर बच्चों का एनआरसी के माध्यम से इलाज किया जाता है।
- निधि सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी