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घाघरा नदी का पानी स्थिर लेकिन दहशत बरकरार

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घाघरा का जलस्तर स्थिर लेकिन खतरा बरकरार
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बाराबंकी। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थिर हो गया है मगर तराई के लोगों में दहशत बरकरार है। इसकी वजह ये है कि नेपाल से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे घाघरा नदी में उफान आ जाएगा।


घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से नीचे 105.596 पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। कंट्रोल रूम की मानें तो यदि नेपाल पानी नहीं छोड़ता है तो देर रात से नदी का जलस्तर घटने लगेगा और यदि नेपाल पानी छोड़ता है तो नदी का जलस्तर घटने के बजाए फिर से बढ़ना शुरू हो जाएगा।
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क्योंकि अभी कुछ दिन पूर्व नेपाल द्वारा इतना पानी छोड़ दिया गया था कि जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 12 से अधिक गांवों तक पहुंच गया था। जिससे तराई के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए थे।


तराई वासियों का कहना है कि, घाघरा नदी में प्रतिवर्ष बाढ़ आती है और जिले की तीन तहसीलों के सैकड़ों गांव नदी के पानी की चपेट में आ जाते हैं। इस बार भी ऐसा कुछ होगा, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
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यहां के लोगों का कहना है कि, नदी का पानी किसी भी समय बढ़ सकता है क्योंकि नेपाल से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है।


इस संबंध में एडीएम संदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि, घाघरा नदी का पानी बढ़ने के बाद स्थिर हो गया है। नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखने के निर्देश तीनों तहसीलों के एसडीएम को दिए गए हैं।
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