घाघरा का जलस्तर सोमवार को फिर घटने लगा। जलस्तर के घटते ही नदी में तेजी से कटान शुरू हो गई है। तहसील रामसनेहीघाट व सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के परसावल व इटहुआपूरब में 70 बीघा खेत घाघरा मे समा चुके हैं। इन खेतों में अधिकतर गन्ना लगा था। जलस्तर घटते ही बांध के कट एवं स्परों को मजबूत करने का काम भी ठप पड़ा है।
दो दिन पूर्व घाघरा नदी का पानी तेजी से घट रहा था। रविवार को अचानक पानी दोबारा बढ़ने लगा। वहीं सोमवार को पानी वापस घटने लगा। पानी घटने के साथ नदी के रेता में लगे ग्रामीण बंसराज, देवीदीन, रमेश, सहित आधा दर्जन किसानों की गन्ने की फसल नदी के कटान में समा गई।
इटहुआपूरब में बाबू उदयराज के खेतों को लगातार नदी काट रही है। घाघरा की धारा एल्गिन चरसड़ी तटबंध के ग्राम परसावल की ओर बढ़ रही है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि खेत व खाली जमीनें कट कर नदी में समाहित होती जा रही है। जिससे ग्रामीणों मे दहशत है। लोग पलायन कर तटबंध व अन्य गांवों में शरण ले रहे हैं।
स्कूल नहीं जा रहे शिक्षक
बाढ़ क्षेत्र के विद्यालयो में तैनात शिक्षक पर अधिकारियो का कोई असर नही पड़ा है। परसावल प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक सोमवार को भी वहां नहीं पहुंचा ग्रामीणों की बार बार शिकायत के बाद भी अधिकारी शिक्षक को बचाने मे जुटे हैं।
ग्रामीण रामकुमार ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद से शिक्षक द्वारा एक भी दिन विद्यालय नहीं चलाया गया। लेकिन उपस्थित रजिस्टर के साथ मिड डे मील डेली बना दिखाकर शासन के पैसे का दुरुपयोग कर शिक्षक व प्रधान अपनी जेब भर रहे है।
एडीएम ने किया निरीक्षण
बाढ़ क्षेत्र मेे पहुंचे अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया द्वारा 25 अस्थाई शौचालय, व 30 हैंडपंप लगाने के लिए तत्काल डीपीआरओ व मौके पर मौजूद बीडीओ पूरेडलई को निर्देशित किया था। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी इनका निर्माण शुरू नहीं हो सका।