घट रही घाघरा बढ़ रही दुश्वारियां, नहीं मिल रही राहत
- खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर है नदी का पानी
- गांवों में पानी भरने से कभी भी फैल सकता है संक्रामक रोग
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बाराबंकी। घाघरा नदी का पानी धीरे-धीरे घटने लगा है। इसके बाद भी नदी का पानी अभी खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर है। नदी का पानी भले ही गांवों से कम हो रहा है लेकिन संक्रामक रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा बंधों पर जीवन गुजार रहे बाढ़ पीड़ितों को तमाम तरह की दुश्वारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से 28 सेमी ऊपर है। पानी भले ही घट रहा हो लेकिन जिन गांवों में पानी भरा था वहां अब संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। बंधे पर परिवार के साथ जीवन गुजार रहे बदलू, राम प्रसाद और शंकर पिछले तीन दिनों से बुखार से पीड़ित हैं। उपचार नहीं मिलने पर शुक्रवार को परिवारीजन उन्हें उपचार के लिए निजी चिकित्सक के पास ले गए। इसके अलावा तिरपाल तानकर बंधों पर जीवन गुजार रहे परिवारों को और भी कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनके सामने सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के चारे की है। क्योंकि हर तरफ पानी ही पानी है ऐसे में चारा जुटा पाना इनके लिए सबसे मुश्किल है।
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घाघरा का पानी तेजी से घट रहा है संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने सीएमओ को आवश्यक निर्देश दिए हैं और स्वास्थ्य टीम भी सक्रिय कर दी गई हैं। बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं पर बराबर नजर रखी जा रही है और उनके निराकरण के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- संदीप कुमार गुप्ता, एडीएम
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टिकैतनगर (बाराबंकी)। क्षेत्र के दर्जन भर गांवों की सड़कों पर आज भी नाव चल रहे हैं और लोग आज भी नाव का ही सहारा लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे है। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सनावा, टेपरा, बघौली पुरवा, सरइंया, भौरीकोल, गोबरहा, तेलवारी, अतरसुइया आदि गांवों के सड़कों पर अब भी बाढ़ का पानी बहने के कारण वाहनों का चलना मुश्किल है। जिसके कारण लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए अब भी नाव का ही सहारा लेना पड़ रहा है। सनावा के कुछ मजरों में अब तक केवल तिरपाल का ही वितरण कराया जा सका है। बाढ़ के प्रकोप से पिछले सात दिनों के अंदर बाढ़ प्रभावित गांवों के करीब एक सौ पचास लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो चुके हैं। बीमारों में महिला व बच्चों की संख्या अधिक है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी कम हो गया है और सड़कों से आवाजाही शुरू हो गई है वहां के लोग स्वास्थ्य विभाग के शिविरों में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। पुराने इलाकों में पानी घटने के बाद जल जनित रोग भी पांव पसारने लगे हैं। हालांकि शुक्रवार को एसीएमओ डॉ. राजीव सिंह टीम के साथ नाव से सिरौली सीएचसी के सनावा, टेपरा, बोधिकपुरवा में दवाओं का वितरण करने पहुंचे। लेकिन सीएचसी टिकैतनगर क्षेत्र से कागजों पर ही दवाओं का वितरण किया जा रहा है।