सामाजिक विषमता पर तीखा प्रहार है मुक्तिबोध की कविता
- जयंती पर मुक्तिबोध का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर संगोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। मुक्तिबोध की कविता सामन्ती व्यवस्था, पाखण्ड, अन्ध विश्वास और सामाजिक विषमता पर तीखा प्रहार है। वहीं शोषितों के प्रति गहरी संवेदना एवं जनतान्त्रिक चेतना को स्वर प्रदान करती है। यह विचार जनेस्मा के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश मल्ल ने राम सेवक यादव परास्नातक महाविद्यालय चन्दौली में गजानन माधव ‘मुक्तिबोध‘ की जयन्ती पर मुक्तिबोध का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किये।
संगोष्ठी की अध्यक्षता जनेस्मा के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. भगवान वत्स ने कहा कि मुक्तिबोध की कविता को समझने के लिए उस संवेदना की अनुभूति आवश्यक है जिसकी अनुभूति मुक्तिबोध को हुई और उन्होने काव्य के रूप में उसे वाणी प्रदान की है। महाविद्यालय की प्राचार्य डा. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि मुक्तिबोध ने कविता को एक नया शिल्प और सौन्दर्य प्रदान किया है। उनकी कविता सामान्य जन की पीड़ा की अभिव्यक्ति है। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी प्रवक्ता डा. रामफेर ने किया। इस मौके पर जीजीआईसी देवा की प्रधानाचार्य डॉ. सुविद्या वत्स,सन्तराम, शिवबालक यादव, अनुज कुमार श्रीवास्तव, स्नेहलता, रंजना यादव, सलोनी श्रीवास्तव, राहुल कुमार, पुष्पेन्द्र कुमार व शैलेश सिंह आदि मौजूद थे।