बाराबंकी। स्थानीय तहसील क्षेत्र में 46 राजस्व गांवों के नक्शे न होने का खामियाजा आम जनता के साथ-साथ सरकारी खजाने को भी भुगतना पड़ रहा है। तहसील के कुल 373 राजस्व गांवों में से 46 ऐसे हैं, जिनके नक्शे या तो उपलब्ध नहीं हैं, या फिर वे इतने कटे-फटे और उर्दू में हैं कि उन्हें पढ़ा नहीं जा सकता। इन गांवों में पोखरा, कमेला, मोहम्मदपुर, गोसियामऊ, थलवारा, जलालपुर व मोतिकपुर के नाम प्रमुख हैं। नक्शे न होने का फायदा उठाकर भू-माफिया सरकारी तालाबों, पोखरों, चारागाहों और चकमार्गों पर दशकों से अवैध कब्जा जमाए हुए हैं। लेखपाल और राजस्व निरीक्षक नक्शा उपलब्ध न होने की रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण कर देते हैं।
पट्टे की भूमि पर भी कब्जे का इंतजार
मर्दापुर गांव में 30 साल पहले पट्टे पर मिली भूमि पर कब्जा मिलने का सपना देखते हुए राम नरायण की मौत हो गई। अब उनके पुत्र कमलेश और जयकरन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक भूमि पर अधिकार नहीं मिला है। अंबरगंज गांव के मातादीन, विदई और बच्चू लाल जैसे लोगों को भी पट्टे की भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाया है। चारागाह की भूमि पर भी खेती कर घूर लगाए जा रहे हैं। इस तरह के मामले अक्सर तहसील के समाधान दिवस में आते हैं।
यही नहीं पोखरा गांव में 36 सरकारी तालाबों में से 10 तालाबों की जमीन पर खेती की जा रही है। लेकिन कब्जा हटवाया नहीं जा पा रहा। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अचल कुमार मिश्रा का कहना है कि डीएम व एसडीएम से कई बार इस संबंध में बात की जा चुकी है। पर हुआ कुछ नहीं। एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि शीघ्र ही नक्शा के संबंध में प्रस्ताव भेजा जाएगा।