बाराबंकी। मोतियाबिंद आपरेशन के लिए मरीज तो चिहिन्त किए जा रहे लेकिन आपरेशन नहीं हो रहे। कहीं पर डॉक्टराें की कमी आड़े आ रही है तो कहीं पर संसाधन नहीं है। सबसे खराब स्थिति रामसनेहीघाट और इससे भी खराब स्थिति हैदरगढ़ की हैं। यहां की ओटी इस लायक नहीं है कि इसमें आंख के आपरेशन किए जा सके। परिणामस्वरूप मोतियाबिंद के लिए चिहिन्त किए मरीज समय का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में चार इंट्रा आकुलर लेंस प्रत्यारोपण (आईओएल) केंद्र फतेहपुर, हैदरगढ़, रामसनेहीघाट और हैदरगढ़ में संचालित है। इनमें से किसी भी केंद्र पर नेत्र सर्जन नहीं है। फतेहपुर में सुविधा हैं लेकिन आपरेशन नहीं हो रहे हैं। रामसनेहीघाट केंद्र का माइक्रोस्कोप सिरौलीगौसपुर चला गया।
सिरौलीगौसपुर को आईओएल केंद्र कागजों पर चल रहा है क्योंकि यहां का केंद्र संयुक्त चिकित्सालय में ही मर्ज हो गया है। यहां के डॉक्टर ने भी अपनी तैनाती संयुक्त चिकित्सालय में करा ली। हैदरगढ़ का केंद्र इस लायक नहीं है कि यहां पर आंखों के आपरेशन किए जा सके। चिकित्सकों का मानना है कि यदि इस ओटी में आंख का आपरेशन कर दिया जाए तो इंफेक्शन फैलने का खतरा ज्यादा रहेगा। इसी वजह से यहां पर आंख के आपरेशन नहीं किए जा रहे हैं।
जबकि अस्पतालों में तैनात नेत्र सहायकों ने अब तक करीब 4500 मरीज ऐसे चिहिन्त किए हैं जिनके मोतियाबिंद के आपरेशन किए जाने हैं। देखा जाए तो अप्रैल से अब तक महज 450 मरीजों के ही मोतियाबिंद के आपरेशन किए जा सके हैं अन्य मरीजों को अक्टूबर से आगे का समय दिया जा रहा है।
महज दो नेत्र सर्जन के सहारे आंखों के मरीज
एसीएमओ डॉ. संजय बाबू आंख के अच्छे सर्जन की श्रेणी में आते हैं इन्हें आंखों के आपरेशन के मामले में प्रदेश में पहला, चौथा और पांचवा स्थान मिल चुका है। बताते हैं कि वह जिले में वर्ष 2012 में आए थे और तब से अब तक करीब 12 हजार से अधिक आंखों के आपरेशन कर चुके हैं।
एक अन्य डॉ. हसन सलीम संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में हैं। ये दोनों चिकित्सक ऐसे हैं जो कैंप लगाकर मोतियाबिंद के आपरेशन करते हैं। इसके अलावा दो चिकित्सक संजीव साहू और ज्योति गुप्ता (संविदा) जिला अस्पताल में तैनात हैं जो अस्पताल में आने वाले मरीज देखते हैं। परंतु आंखों के आपरेशन का जिम्मा महज डॉ. संजय पर ही है जिनकी देखरेख में ही अस्पतालों में मोतियाबिंद के आपरेशन होते हैं।
नेत्र का सबसे अच्छा सर्जन डॉक्टर हमारे पास है, इनकी अगुवाई में टीम मोतियाबिंद के मरीजों का समय-समय पर आपरेशन करती है। मौजूदा समय में मौसम आंखों के आपरेशन के अनुकूल नहीं है। ऐसे में आंखों का आपरेशन करने से इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। आखाें के आपरेशन के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च अप्रैल तक रहता है। यहीं वजह है कि जो मरीज चिहिन्त किए गए हैं उनके आपरेशन रोक दिए गए हैं।
डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ