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363 स्थानों से हटाए गए लाउडस्पीकर

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363 स्थानों से हटाए गए लाउडस्पीकर
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- अनुमति के लिए आए थे 2105 आवेदन
- जांच के बाद 1742 को दी गई मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाए जाने की अनुमति दिए जाने की अंतिम तिथि बीतने के बाद 363 स्थानों से लाउडस्पीकर हटवा दिए गए हैं। इन स्थानों पर अब लाउडस्पीकर नहीं बज पाएंगे। क्योंकि जांच रिपोर्ट में इन स्थानों पर अनुमति न दिए जाने की संस्तुति की गई थी। जिसके बाद से जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
शासन से मिले आदेश के बाद धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाने के लिए अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। जिसके तहत जिले भर से करीब 2105 लोगों ने अनुमति दिए जाने के लिए आवेदन किया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद इनमें से 1742 स्थानों पर लाउडस्पीकर बजाए जाने की अनुमति जिला प्रशासन ने दे दी है। लेकिन जिन 363 स्थानों की जांच रिपोर्ट में अनुमति न दिए जाने की संस्तुति की गई है उन स्थानों को अनुमति नहीं देने के साथ ही तहसील और पुलिस प्रशासन ने इन स्थानों से लाउडस्पीकर हटवा दिए हैं। इसके अलावा वैवाहिक और अन्य समारोहों के लिए 125 लोगों को लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करनेे की अनुमति दी गई है। अनुमति दिए जाने की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद अब किसी को भी कोई अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया लंबित नहीं चल रही है। इसके अलावा जिन स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाए जाने की अनुमति दी गई है उन्हें यह निर्देश भी दिया गया है कि वह निर्धारित मानक के अनुसार ही ध्वनि का प्रयोग करेंगे। इसका उल्लघंन पर दी गई अनुमति समाप्त कर दी जाएगी।
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यहां लगी रोक
शहर के पीरबटावन, सट्टीबाजार, गुलरियागार्दा, पायनियर चौराहा, बडेल चौराहा, पुलिस लाइन चौराहा, बस स्टेशन, धनोखर चौराहा, नाका सतरिख, नाका पैसार, पलहरी चौराहा आदि स्थान हैं जहां पर शोरगुल ज्यादा होता है। वहीं प्रशासन ने रात दस बजे से सुबह छह बजे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
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फोटो- 43, 44, 45
क्या कहते हैं शहरवासी
शहर निवासी दिनेश तिवारी कहते हैं कि तेज ध्वनि से लाउडस्पीकर बजाने का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। मौजूद समय में परीक्षाएं नजदीक है ज्यादातर बच्चे तैयारियों में व्यस्त हैं ऐसे में तेज ध्वनि से लाउडस्पीकर बजाए जाने पर रोक सराहनीय है। यहीं के निवासी नूरआलम कहते हैं कि तेज ध्वनि किसी भी चीज की हो वह हमेशा ही घातक होती है। जिस प्रकार से लाउडस्पीकर की आवाज का एक मानक तय किया गया है इसी प्रकार वाहनों में लगने वाले हॉर्न का भी मानक तय होना चाहिए। यहीं के निवासी दिनेश यादव कहते हैं कि तेज ध्वनि से कोई भी वस्तु नहीं बजाना चाहिए इसका विपरीत प्रभाव पड़ता खासकर उन लोगों पर जो किसी न किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे होते हैं।
वर्जन :
धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाए जाने की अनुमति के लिए कुल 2105 आवेदन आए थे इनमें से 1742 को अनुमति दे दी गई। शेष 363 स्थानों से लाउडस्पीकर हटवा दिए गए हैं। एक निर्धारित ध्वनि के मानक में ही लाउडस्पीकर बजाए जाने की अनुमति दी गई है।
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- अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी

रामलीला से लाउडस्पीकर उतरवाने पर थाने पर किया प्रदर्शन
सिरौलीगौसपुर(बाराबंकी)। ग्राम दरिगा पुर मे चल रहे राम लीला कार्यक्रम मे देर रात तक लाउडस्पीकर बजाने को लेकर भाकियू सावित्री गुट की राष्ट्रीय अध्यक्ष सावित्री सिंह ने सैकडों कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली बदोसरांय पंहुच कर थाने पर नारे बाजी की और बवाल कांटा। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बदोसरांय श्याम नारायण पांडेय ने बताया कि बीती रात दस बजे के बाद रामलीला में बज रहे लाउडस्पीकर को हल्का दरोगा रवीन्द्र सिंह ने उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए उतरवा दिया था। इसी बात को लेकर यह प्रदर्शन किया गया है। इस संबंध में आलाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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