बाराबंकी। घाघरा नदी का पानी तेजी से भले ही कम हो रहा है लेकिन एल्गिन चरसड़ी तटबंध में नयापुरवा के पास हो रही कटान जारी है।
रविवार को भी बांध का करीब दस मीटर हिस्सा नदी की धारा में समा गया है। वहीं दिन में हुई तेज बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है।
घाघरा नदी का पानी भले की कम हुआ है लेकिन वह खतरे के निशान से अभी भी 32 सेमी ऊपर बह रहा है। लेकिन पिछले तीन दिनों नदी का पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध के हिस्से को नयापुरवा के निकट काट रहा है।
तटबंध का अब तक 90 मीटर हिस्सा नदी की धारा में समा चुका है। बंधे पर बसे लोगों की माने तो बाढ़ खंड बंधे की मरम्मत के नाम पर महज औपचारिकता निभा रहा है।
बंधे की मरम्मत के लिए अब तक जो भी प्रयास किए गए हैं वह सिर्फ खाना पुरी तक सीमित रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि दो दिन पहले जिस तरह से कटान हो रही थी उसी तरह से यदि होती तो अब तक बंधा कट गया होता और नयापुरवा गांव को भी अपने साथ बहा ले गया होता।
जिससे बाढ़ पीड़ित नावों के सहारे गांवों को जा रहे हैं और छतों पर रखी गई सामग्री को बंधे पर ला रहे हैं। वहीं, सूरतगंज क्षेत्र के हेतमापुर, कचनापुर, सुंदरनगर में भी पानी कम होने बाढ़ पीड़ित गांव को आने जाने लगे हैं।
बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट
बारिश ने बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। बंधे पर बसे नयापुरवा निवासी हरिश्चंद्र, केसरी, रामनरेश, राजू, सुकई आदि ने बताया कि सुबह से ही बहुत तेज बारिश हो रही है।
शाम को पांच बजे पानी कुछ कम हुआ था लेकिन पहले तो गांव को जाने की हिम्मत जुटाई गई लेकिन बाद में हिम्मत हार गई। बारिश होने के बावजूद मवेशियों के लिए किसी तरह से चारे का तो इंतजाम कर लिया गया लेकिन दो वक्त की रोटी का जुगाड़ नहीं हो सका है।
थोड़ा बहुत जो राशन पहले से मौजूद है उसे से गुजर बसर की जाएगी। बाढ़ पीड़ितों ने आरोप लगाया कि बंधे की मरम्मत का जो कार्य किया जा रहा है उसमें औपचारिकता निभाई जा रही है।
घाघरा नदी का पानी बहुत तेजी के साथ कम हो रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों से भी कम होने लगा है। बांध कटने की जानकारी बाढ़ खंड के अधिकारियों को दे दी गई थी जो बंधे की मरम्मत का कार्य बहुत ही तेजी के साथ करा रहे हैं। इसके अलावा बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण भी कराया जा रहा है।
- अनिल कुमार सिंह, एडीएम