सिंचाई विभाग की लापरवाही से बृहस्पतिवार की भोर कटी शारदा सहायक नहर की पटरी से खेतों में भरा पानी कई किसानों को गहर जख्म दे गया। शुक्रवार की भोर तक पटरी को बांध दिया गया लेकिन खेतों में सिल्ट जमा होने और पानी भरा होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। करीब 50 बीघा क्षेत्रफल में तो बालू की एक से डेढ़ फिट मोटी परत जम गई है।
करीब पांच सौ बीघा में लगी मेंथा की फसल पानी भर जाने से यह नष्ट हो गई। जिससे किसानों को करीब 40 लाख का नुकसान हुआ है। दरियाबाद थाना क्षेत्र के चमरौली रेगुलेटर के करीब दो सौ मीटर पहले शारदा सहायक नहर खंड-25 की दक्षिणी पटरी बृहस्पतिवार की भोर कट गयी थी। पटरी कटते ही एक हजार बीघे फसल पानी में डूब गई। साथ ही करीब छह गांव में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे।
खेतों में पानी भर जाने से मेंथा की फसल को भारी नुकसान हुआ है। गांव के किसान हेतराम, लालजी व सुधीर ने बताया क्षेत्र के करीब पांच सौ बीघा में लगी मेंथा की फसल चौपट हो गई है। इसके अलावा करीब 50 बीघे खेत में सिल्ट जमा है। खेतों में सिल्ट की पर्त करीब एक से डेढ़ फिट तक जमा है। इससे इन खेतों को सुधारने में किसानों को महीनों लगेंगे।
मेंथा किसानों ने बताया कि एक बीघा में औसतन 8 लीटर तेल निकलता है। ऐसे में करीब पांच सौ बीघा फसल पटरी करने से प्रभावित हुई है। किसानों को करीब चालीस लाख रुपये की क्षति हुई है। सिल्ट पटे खेत से बालू निकलवाले के किसानों को काफी रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
21 घंटों में बांधी नहर की कटी पटरी
दरियाबाद थाना क्षेत्र के चमरौली रेगुलेटर के करीब दो सौ मीटर पहले शारदा सहायक नहर खंड-25 की पटरी करीब 30 मीटर लंबाई में कट गई थी। इन पटरी को पाटने के लिए विभाग द्वारा तीन जेसीबी व करीब डेढ़ सौ ग्रामीण पटरी को बंाधने में लगे थे।
लेकिन बहाव इतना तेज था कि पटरी को पाटने में 21 घंटे का समय लगा। शुक्रवार की भोर करीब 2 बजे पटान की जा सकी। इसके बाद मिट्टी से सुबह तक पटान जारी रही। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि शारदा नहर की कटान को पूरी तरह से पाट दिया गया है।