हैदरगढ़ (बाराबंकी)। बात हैरत की है मगर सौ सच। मानसूनी बारिश से निपटने को नगर पंचायत ने नाला सफाई पर तकरीबन साढ़े चार लाख खर्च कर दिए हैं। बावजूद इसके उसकी सूरत बदरंग है। हालात यह है कि कस्बे का मुख्य नाला गंदगी बजबजा रहा है। जलनिकासी के अभाव में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर पंचायत हैदरगढ़। यहां के बारह वार्डों की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने को करीब दस किमी लंबे नाले-नालियों का निर्माण कराया गया है। इसके जरिए समूचे नगर पंचायत की जलनिकासी होती है। हर बरस मानसून आने से पहले यहां के नाले और नालियों की नगर पंचायत द्वारा सफाई कराई जाती है। इस पर लाखों का बजट व्यय किया जाता है। इस बार भी नगर पंचायत ने यहां के नाले-नालियों की सफाई का ठेका निजी हाथों में सौंपा था। इस कार्य पर तकरीबन साढ़े चार लाख व्यय हुए। विभागीय जानकारों की मानें तो नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ फर्ज अदायगी की गई है। सफाई कर्मियों से ही कूड़ा नालियों से निकाल कर समीप ही ढे़र लगवा दिए गए। इस वजह से समूचे शहर में गंदगी का बोलबाला है। कस्बे में सरांय मस्जिद व हनुमान मंदिर के समीप लखनऊ मार्ग के दूसरी ओर मुख्य निकासी नाला से होकर आधे कस्बे का पानी झील में पहुंचता है। यह नाला कूड़े से पूरी तरह पटा है। जिससे वहां की जलनिकासी पूरी तरह से अवरूद्घ है। जिस कारण लोगों को परेशानी हो रही है। यहां के निवासी पप्पू शुक्ला, जगदीश मिश्र, पिंकी सिंह, रेखा, सुशील पांडेय, दीपक व दिनेश वर्मा ने कहा कि बीते एक वर्ष से नाला की सफाई नहीं कराई गई है। नाला के कूड़ा करकट से पटा होने पर दूषित पानी इनके घरों के समीप जमा है तथा दुर्गंध के कारण घरों में रहना भी मुश्किल हो रहा है। इन लोगों ने कहा कि एक दिन भी कायदे से बारिश हुई तो कस्बे के काफी घरों में दूषित पानी भर जाएगा। ईओ राजेश कुमार ने कहा कि नाला व नालियों की सफाई के लिए ठेका दिया गया है। अभी सफाई कार्य चल रहा है। बारिश में पानी निकासी को लेकर नगर में कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।