बाराबंकी जिले में जलभराव, ऊसर और कम उपजाऊ भूमि किसानों के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत ऐसी जमीनों का उपचार होगा। दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना से जिले में करीब 35000 हेक्टेयर बंजर व जलभराव वाली भूमि को खेती योग्य बनाया जाएगा। इसकी मंजूरी मिल गई है।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिले में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि भूमि सड़क, हाईवे, औद्योगिक परियोजनाओं और शहरीकरण की भेंट चढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में खाद्यान्न को बढ़ाने के लिए बंजर और अनुपयोगी भूमि को खेती योग्य बनाना जरूरी हो गया है। जिले में करीब 258400 हेक्टेयर जमीन में शुद्ध रूप से खेती होती है।
करीब 56300 हेक्टेयर में ऊसर और बंजर सहित सड़कें व आवासीय क्षेत्र शामिल हैं। इसमें करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर ऊसर, बंजर या जलभराव के कारण खेती नहीं हो पाती है। रामनगर, सिरौलीगौसपुर, फतेहपुर और सरयू नदी के किनारे स्थित क्षेत्रों में जलभराव एवं कम उपजाऊ भूमि ज्यादा है।
योजना के तहत इन जमीनों का समतलीकरण, चेकडैम, जल संचयन संरचनाएं, नालों का निर्माण और जीर्णोद्धार होगा। कृषि वानिकी व पौधरोपण जैसे कार्य होंगे। जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था विकसित कर खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। संवाद
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भूमिहीन मजदूरों को आवंटन, रोजगार भी मिलेगा
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से लघु और सीमांत किसानों, भूमिहीन मजदूरों तथा भूमि आवंटित लाभार्थियों को मिलेगा। अधिकांश कार्य श्रमिकों के माध्यम से कराए जाएंगे और मजदूरी का भुगतान शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर के अनुसार किया जाएगा। इससे रोजगार भी सृजित होगा। प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 113 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर की है। बाराबंकी कृषि प्रधान जिला है। यहां की खेती अब और सशक्त होगी।