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Barabanki News: अव्यवस्थाओं के हाई रिस्क पर 3,268 प्रसूताएं

Mon, 23 Feb 2026 02:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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अरुण पाठक
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जिले में गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभाग अपनी योजनाओं और कर्मचारियों के माध्यम से सक्रिय हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वर्तमान में जिले में लगभग 3,268 प्रसूताओं को ''हाई-रिस्क प्रेगनेंसी'' के तहत चिन्हित किया गया है, जो जच्चा और बच्चा दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गंभीर दशा में इन प्रसूताओं को इलाज के लिए लखनऊ रेफर करना पड़ता है।



गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए गांवों में आशा बहू, उपस्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर चिकित्सकों की तैनाती की गई है। इन स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नियमित अंतराल पर जांच की जाती है। साथ ही, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराया जाता है। इन सबके बावजूद, जिले में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) के मामले चिंताजनक बने हुए हैं।
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पिछले लगभग 10 महीनों में, अप्रैल 2025 से अब तक, जिले में कुल 71,088 गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। इनमें से 3,268 महिलाएं हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में पाई गईं। जांच रिपोर्टों में इन महिलाओं में रक्त की कमी, पीलिया, थायराइड और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का पता चला है। इसके अतिरिक्त, कई मामलों में प्लेटलेट्स की कमी, अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आई हैं।






ये योजनाएं संचालित
गर्भवती महिलाओं के लिए बाल विकास पुष्टाहार की ओर से पोषाहार, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, जननी सुरक्षा योजना समेत कई योजनाओं का लाभ दिया जाता है। यहीं नहीं आशा और एएनएम पर इनकी निगरानी का जिम्मा होता है। इसके बाद भी गर्भवती महिलाओं को न तो योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है और न ही उनकी जांच हो पा रही है, जिसकी वजह से यह एचआरपी की चपेट में आ रही हैं।

वर्जन
जिला अस्पताल में फरवरी माह में ही करीब 233 प्रसूताओं की जांच कराई गई तो यह एचआरपी की श्रेणी में पाई गई हैं। चिकित्सकों की निगरानी में इनका इलाज चल रहा है।

डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस
वर्जन
एचआरपी की श्रेणी में आने वाली प्रसूताओं की सेहत की जांच प्रतिमाह निर्धारित तिथि एक, नौ, 16 और 24 को सभी सीएचसी पर की जाती है। इनकी सेहत की देखभाल की जिम्मेदार आशा और एएनएम को दी गई इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ
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हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के प्रमुख कारण

पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं: महिलाओं में पहले से मौजूद मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य पुरानी बीमारियां गर्भावस्था को जोखिम भरा बना सकती हैं।


गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं: जैसे कि पूर्व में गर्भपात का इतिहास, समय से पहले प्रसव, या जुड़वां बच्चों की गर्भावस्था।



जीवनशैली: असंतुलित आहार, धूम्रपान, शराब का सेवन और अत्यधिक तनाव भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।



उम्र: बहुत कम उम्र (किशोर) या अधिक उम्र (35 वर्ष से ऊपर) में गर्भधारण करना भी जोखिम भरा हो सकता है।



पोषण की कमी: गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण न मिलने से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
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