पार्टी का सिंबल ठुकराया, जनता ने गले लगाया
- देवा, फतेहपुर व रामनगर प्रत्याशियों ने ठुकरा दिया था सपा का सिंबल
बाराबंकी। पार्टी का सिंबल ठुकराने केे बाद भी जनता ने जो फैसला सुनाया वह आश्चर्य चकित करने वाला है। जनता ने पार्टी को नहीं प्रत्याशी को ही तवज्जो दिया। यही कारण है कि पार्टी का सिंबल ठुकराने के बाद भी जनता ने उन्हें गले लगाया है। फतेहपुर नगर पंचायत में आजादी के बाद से एक ही परिवार का वर्चस्व है। इस बार भी जनता ने उन्हीं के परिवार के एक सदस्य पर भरोसा जताया है। रामनगर और देवा में भी प्रत्याशियों ने पार्टी का सिंबल के बजाय निर्दलीय चुनाव लडने का फैसला किया तो जनता ने भी उनपर भरोसा जताया।
नगर निकाय चुनाव में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे साहबे आलम वारसी ने भले ही समाजवादी पार्टी की ओर से दिए गए सिंबल को ठुकरा दिया हो, मगर जनता ने तो उन्हें एक बार फिर से गले लगाकर साफ कर दिया कि वह सिंबल नहीं व्यक्तित्व की जीत के पक्षधर हैं। 12285 मतदाताओं वाली नगर पंचायत देवा को सपा का गढ़ माना जाता है यहां पर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में अधिकतम वोट समाजवादी पार्टी के पक्ष में जाता रहा है। इस बार निकाय चुनाव में अपना सिंबल देने वाली समाजवादी पार्टी ने भी निवर्तमान चेयरमैन साहबे आलम वारसी को सपा का सिंबल दिया था। लेकिन बाद में अपरिहार्य कारणों से साहबे आलम ने सिंबल ठुकरा दिया था और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर ऐतिहासिक जीत दोबारा दर्ज की। फतेहपुर नगर पंचायत में आजादी के बाद से ही एक ही परिवार के सदस्य नगर पंचायत अध्यक्ष के पद पर काबिज रहे हैं। मोहम्मद मशकूर दो बार चेयरमैन रहे। नगर अध्यक्ष की महिला सीट होने के बाद मोहम्मद मशकूर ने पत्नी रेशमा मशकूर को प्रत्याशी बनाया लेकिन सपा का सिंबल लेने से मना कर दिया। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडने का फैसला किया और 2 हजार 445 वोटों से जीत हासिल की। रामनगर में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बद्री विशाल त्रिपाठी ने सपा से टिकट लेने से इंकार कर दिया। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और पूर्व चेयरमैन रहे भाजपा के प्रत्याशी रामसरन पाठक को 345 मतों से हराया। प्रत्याशियों ने सिंबल ठुकरा दिया तो जनता ने उन्हेें गले लगा लिया। मतदाताओं की नजर में सिंबल की जगह व्यक्तित्व, चेहरा व काम दिखा।