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नागपंचमी आज, घर-घर पीटी जाएंगी गुडिय़ा

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बाराबंकी। सावन माह की शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाए जाने वाला पर्व नागपंचमी शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। परंपरा के रूप में घर-घर गुडिय़ा पीटी जाएगी। नागपंचमी पर सर्प को दूध पिलाने की पंरपरा है। नागपंचमी पर खागलदेव मंदिर व मजीठा में भव्य मेला लगेगा।
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मंजीठा स्थित नागदेवता के मंदिर पर नागपंचमी को लगने वाला मेला आस्था रखने वाले भक्तों के लिए अलग ही महत्व रखता है। गुरुवार शाम से ही भक्तों भीड़ जुटना शुरू हो गई। शुक्रवार को नागपंचमी पर श्रद्धालु नागदेवता की बांबी पर दूध चावल चढ़ाकर पूजन अर्चन करेंगे। नाग पंचमी पर शहर ही नही ग्रामीण अंचलों में परंपरा के अनुसार घर-घर गुडिय़ा पीटी जाएंगी। देवा क्षेत्र के ग्राम कुसुंभा स्थित विषहरण खागलदेव मंदिर में नागपंचमी पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा होगा। मंदिर के विषय में मान्यता है कि इस मंदिर में सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को लाकर यहां स्थित प्राचीन मंदिर के कुएं के पानी से नहलाया जाए व खागल बाबा की दुहाई बोलने मात्र से ही सर्प के विष का प्रभाव खत्म हो जाता है। नागपंचमी के मौके पर मेला लगेगा।

मजीठा मेले में आज होगा जवाबी कीर्तन
मजीठा मेले में शुक्रवार शाम जवाबी कीर्तन का आयोजन किया गया है। जिसमें शेखर कोमल लखीमपुर व रोशनी अनजान लखनऊ के बीच जवाबी कीर्तन होगा। यह जानकारी मेला कमेटी के सह-प्रबंधक लालता प्रसाद ने दी।
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नागपंचमी को नाग जाति की हुई थी उत्पत्ति
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग जाति की उत्पत्ति हुई थी। महाभारत की कथा के अनुसार जब महाराजा परीक्षित को उनका पुत्र जनमेजय तक्षक नाग के काटने से नहीं बचा सका तो जनमेजय ने विशाल सर्प यज्ञ कर यज्ञाग्रि में भस्म होने के लिए तक्षक को आने पर विवश कर दिया। तब आस्तिक मुनि के आग्रह और तक्षक के क्षमा मांगने पर उसे क्षमा कर दिया। उन्होंने वचन दिया कि श्रावस मास की पंचमी को जो व्यक्ति सर्प व नाग की पूजा करेगा उसे सर्प व नाग दोष से मुक्ति मिलेगी। तभी से नाग पंचमी मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है।
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