परिषदीय विद्यालय की बोर्ड परीक्षाएं सोमवार से शुरू हो गई। पहले दिन तीन लाख बच्चों द्वारा परीक्षा दिए जाने का दावा किया गया है।
वहीं विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के बीच बच्चों को बैठाया गया। प्राइमरी के बच्चे चटाई पर तो जूनियर विद्यालय के बच्चे बेंच पर नजर आए।
बोर्ड परीक्षा को लेकर बच्चों और शिक्षकों में उत्साह दिखाई दिया। शासन ने इस वर्ष परिषदीय विद्यालय की परीक्षाएं बोर्ड की तर्ज पर कराने के आदेश जारी किए।
परीक्षा में तकरीबन तीन लाख बच्चे शामिल हुए। जिनको प्रश्नपत्र और कापियां उपलब्ध कराने के लिए धन भी दिया गया। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय पूरेमोती, आवास विकास, पुलिस लाइन में बच्चे परीक्षा देते दिखाई दिए।
यहां पर प्राथमिक विद्यालय के बच्चे चटाई पर तो जूनियर विद्यालय के बच्चे बेंच पर बैठे दिखे। इसके अलावा हैदरगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बंभरौली, शिवपुर, अखैया आदि में भी बच्चे पूरे उत्साह के साथ परीक्षा देते दिखाई दिए।
बोर्ड की तर्ज पर हो रही परिषदीय विद्यालयों की परीक्षाओं को लेकर शिक्षकों का नजारा भी बदला रहा। शिक्षक शासन के इस फैसले से संतुष्ट दिखे।
अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी होनी चाहिए ः परीक्षा देने आए कक्षा आठ के छात्र पवन कुमार, रामू, नन्हा, श्याम बिहारी, अमन वर्मा आदि ने बताया कि इसी तरह त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी होनी चाहिए। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति और रुचि बढ़ेगी।
जूनियर की परीक्षा दे रहे छात्र रोहित, अनिल, राकेश आदि ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में बोर्ड की तरह जो परीक्षाएं हो रही हैं वह छात्रहित में हैं। क्योंकि इससे हमें यह सीखने को मिल रहा है आगे चलकर बोर्ड की परीक्षाएं कैसे देनी है।