जिले में संचालित नर्सिंग होम पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मेहरबान है। जिले भर में करीब 250 नर्सिंग होम ऐसे हैं जो बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को एक-एक अस्पताल की जानकारी है लेकिन मिलीभगत और ऊपरी दबाव के कारण उन पर कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई न होने से इनके संचालकों के हौसले बुलंद हैं। विभाग के अनुसार जिले में करीब 90 निजी अस्पताल है जिनका पंजीकरण है।
प्रशासन की नाक के नीचे जिले में करीब 250 निजी अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों की बात छोड़िए, शहर में भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उदाहरण के तौर पर सतरिख नाका से लेकर पल्हरी चौराहे तक जितने भी नर्सिंग होम चल रहे हैं, इनमें ज्यादातर का पंजीकरण नहीं है।
कमोवेश यही स्थिति पूरे जिले की है। जबकि जिलाधिकारी ने भी ऐसे नर्सिंग होम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दे रखे हैं इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जिससे इनके संचालकों के हौंसले खासे बुलंद हैं और यहों मरीजों का खुलेआम शोषण हो रहा है। पिछले एक साल में सिर्फ तीन निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हुई। लेकिन तीनों अस्पताल ग्रामीण इलाकों के हैं। शहर में शायद की कभी अभियान चलता हो।
जिला अस्पताल से मरीज लाते हैं दलाल
शहर में संचालित नर्सिंग होम बेहतर उपचार का दावा करते हैं। नर्सिंग होम संचालकों ने दलाल पाल रखे हैं। ये दलाल जिला पुरुष और महिला अस्पताल के आसपास घूमते आसानी से देखे जा सकते हैं।
ये दलाल यहां आने वाले मरीजों के तीमारदारों को बेहतर इलाज दिलाने का भरोसा दिलाते हैं और उनके मरीज को ले जाकर निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा देते हैं। जहां पर चिकित्सक उपचार के नाम पर हजारों रुपये ऐंठते हैं और चुकता नहीं करने पर मरीज को तब तक डिस्चार्ज नहीं करते हैं जब तक तीमारदार पूरा पैसा नहीं जमा कर देते हैं।
व्यवस्था में कुछ बदलाव किया जाना था जो कर लिया गया है। डीएम का भी आदेश है कि नर्सिंग होम के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जाए। करीब 90 निजी अस्पतालों का पंजीकरण है। गैर पंजीकृत नर्सिंग होम की जांच के लिए जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा। इसको लेकर आवश्यक निर्देश भी एसीएमओ को दे दिए गए हैं। -डॉ. सतीश चन्द्रा, सीएमओ