बाराबंकी। वित्तीय वर्ष 2022-23 के आखिरी दिन बकाया बजट खपाने को लेकर देर रात तक माथापच्ची होती रही। कोषागार में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने बिल पास कराने के लिए जमे रहे। वहीं कोषागार के कर्मचारी कंप्यूटर पर बिलों पर स्वीकृति प्रदान करने में जमे थे। दिनभर की माथापच्ची के बाद शाम आठ बजे तक करीब 16 करोड़ के बिलों पर स्वीकृति हो गई थी। इसके बावजूद भी करीब पौने सात अरब खपाने के लिए कागजी खानापूर्ति देर रात तक जारी रही। बिल प्रस्तुत न होने की स्थिति में विभागीय अधिकारी बजट समायोजित कराने के लिए प्रयास करेंगे।
वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए पिछले 48 घंटों में शासन ने तमाम परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए करोड़ों रुपये अलग-अलग विभागों को भेजे हैं। देर शाम तक 30.57 अरब रुपये विकास कार्यों के अलावा विभिन्न मदों में जिले को उपलब्ध कराए गए हैं। करीब एक सप्ताह से बजट खपाने के लिए विभागों में माथापच्ची चल रही है। यही वजह है कि शुक्रवार को अंतिम दिन डीएम कार्यालय के अलावा लोक निर्माण विभाग, डीपीआरओ, स्वास्थ्य विभाग समेत कई ने बिल प्रस्तुत किए। रात आठ बजे तक 23.94 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष बिल मंजूर हो चुके हैं।
डीएम को हाईवे आदि निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहीत करने के लिए प्राप्त हुए 50 करोड़ रुपये शत-प्रतिशत खर्च कर लिए गए हैं। इसी तरह जेल को आवंटित 15.73 करोड़ का बजट शत-प्रतिशत खर्च हुआ। होमगार्ड ने वेतन व अन्य मदों में प्राप्त 35.46 करोड़ रुपये खर्च किए। सिंचाई विभाग, खादी एवं ग्रामोद्योग, राष्ट्रीय एकीकरण, सामान्य प्रशासन, शैक्षिक अनुसंधान विभाग भी बजट खर्च करने में आगे रहे। सबसे ज्यादा बजट प्राप्त करने वाले विभाग बिल प्रस्तुत करने में पीछे रह गए। लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, पुलिस और पीएसी, कृषि समेत अन्य तमाम विभाग आवंटित बजट के सापेक्ष बिल प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं।
प्रमुख विभागों में बाकी बजट
गृह विभाग (नागरिक सुरक्षा)- 11.49 करोड़
स्वास्थ्य विभाग- 21.66 करोड़
लोक निर्माण विभाग- 13.68 करोड़
समाज कल्याण- 2.51 करोड़
समाज कल्याण (अनुसूचित वर्ग)- 3.83 करोड़
प्राथमिक शिक्षा- 74.44 लाख
माध्यमिक शिक्षा- 67.27 लाख
उच्च शिक्षा- 92.34 लाख
सैनिक कल्याण- 31.68 लाख
आबकारी विभाग- 1.65 लाख
आवास- 1.90 लाख
उद्योग 5.26 लाख
अंतिम दिन कई विभागों की ओर बजट के सापेक्ष बिल प्रस्तुत किए गए हैं। इन पर काम चल रहा है। मार्च में तीन सौ करोड़ रुपये से ऊपर के बिल पास किए जा चुके हैं।
- मनोज तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी