650 विद्यालयों में अब तक नहीं पहुंची बिजली
बाराबंकी। जिले के परिषदीय विद्यालयों का हाल बेहाल है। इस उमस भरी गर्मी बच्चे बिना बिजली के कक्षा कक्षों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालयों में बाउंड्रीवाल न होने की वजह से नौनिहाल खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं जलनिकासी की व्यवस्था न होने की वजह से परिसर में पानी भर जाता है जिससे बच्चों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की जा सकी है।
जिले में मौजूदा समय में परिषदीय विद्यालयों की संख्या तीन हजार के आसपास है। इनमें प्राइमरी विद्यालयों की संख्या 2271 सौ है। जूनियर विद्यालयों की संख्या 818 हैं। प्राइमरी विद्यालयों में करीब 2 लाख 75 हजार तो जूनियर विद्यालयों में 80 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए करीब 19 हजार 5 सौ शिक्षकों की तैनाती विद्यालयों में है। शैक्षिक सत्र शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं लेकिन ज्यादातर विद्यालयों में अभी तक मध्याह्न भोजन बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें करीब 650 विद्यालय ऐसे हैं जिनका विद्युतीकरण नहीं हो सका है। इसके अलावा 535 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें अभी तक बाउंड्रीवाल का निर्माण तक नहीं कराया जा सका है। इसके अलावा विभाग का दावा है कि जिले में एक भी विद्यालय एकल नहीं है। कुल विद्यालयों में करीब एक हजार विद्यालय ऐसे होंगे जो जल निकासी की समस्या से जूझ रहे हैं।
सीन एक :
प्राथमिक विद्यालय पारा खंदौली। यहां पर चार शिक्षक तैनात है और 53 बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन विद्यालय में एक भी बच्चा मौजूद नहीं था तथा परिसर में पानी भरा हुआ था। विद्यालय में मौजूद शिक्षिका सादिया सिद्दीकी ने बताया कि बाउंड्रीवाल न होने की वजह से परिसर में गांव के लोग इतनी ज्यादा गंदगी फैला रखें हैं कि बच्चे बुलाने के बाद भी विद्यालय नहीं आ रहे हैं। जब बच्चे ही नहीं आ रहे हैं तो मध्याह्न भोजन किसके लिए बनवाया जाए। प्राथमिक विद्यालय सलारपुर में इंजार्च प्रधानाध्यापिका पूजा मौर्या मौजूद मिली, वह कक्ष में बच्चों को पढ़ाते दिखी। मध्याहन भोजन बनाने की तैयारी चल रही है। पूजा ने बताया कि 118 बच्चे पंजीकृत है लेकिन आज 35 ही आए हैं। विद्यालय में चार शिक्षक हैं। बताया कि बिजली कनेक्शन है लेकिन लाइट नहीं आ रही है।
सीन दो
हैदरगढ़ क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय बारा। यहां पर 50 में सिर्फ 12 बच्चे मौजूद थे। विद्यालय में शिक्षिका सुनीता समेत तीन शिक्षक तैनात बताए गए। उन्होंने बताया कि विद्यालय में बिजली का कनेक्शन नहीं है। बाउंड्रीवाल न होने के वजह से दिक्कते हो रही है प्रसाधन खराब पड़ा है जिससे बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। एमडीएम न बनाए जाने के सवाल पर वह कोई जवाब नहीं दे सकी। इसी प्रकार पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलहरा और मोहम्मदपुर खाला का हाल बेहाल है। इन विद्यालयों में बच्चे किस तरह से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं यह वही जान सकते हैं।
स्कूल का प्रसाधन खराब होने से खुले में शौच जाना मजबूरी
प्राथमिक विद्यालय बारा की छात्रा सोनाली बताती हैं कि बाउंड्रीवाल न होने के वजह से पढ़ाई के दौरान अक्सर छूट्टा मवेशी विद्यालय में आ जाते हैं जिससे दिक्कतें होती है। यहीं की छात्रा काजल बताती हैं कि विद्यालय का प्रसाधन खराब होने की वजह से खुले में शौच जाना हम सब की मजबूरी बन गया है। वहीं प्राथमिक विद्यालय गोसूपुर के छात्र सत्य प्रकाश बताते हैं कि विद्यालय में बिजली का कनेक्शन न होने की वजह से पढ़ाई के दौरान दिक्कतें होती हैं। यहीं के छात्र कुलदीप ने बताया कि बाउंड्रीवाल टूटी होने की वजह से हम सभी छात्र खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
जिले के जिन विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन नहीं है और जहां पर बाउंड्री नहीं है तथा टूटी है उसके लिए शासन को पत्र भेजकर धन की मांग की गई है। शैक्षिक सत्र की शुरूआत हो गई है परिसर में जो अव्यवस्थाएं हैं वह एक सप्ताह में दूर करने के आदेश सभी बीईओ को दिए गए हैं। जिन विद्यालयों में मध्याहन भोजन नहीं बन रहा है वहां के शिक्षकों से जवाब तलब किया जाएगा। जिले में एक भी विद्यालय एकल नहीं है। -पीएन सिंह, बीएसए