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जनसंख्या नियंत्रण में बाधा बनी अशिक्षा

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बाराबंकी। जनसंख्या नियंत्रण के लाख प्रयासों के बावजूद समाज पर उसका व्यापक असर पड़ता दिखाई नहीं पड़ रहा है। यही कारण है कि लगातार सड़क, अस्पताल, स्कूल से लेकर पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को आम जनमानस तक पहुंचा पाना सरकार और शासन के लिए टेढ़ी खीर हो रहा है। जनसंख्या में वृद्धि के चलते जमीन सिकुड़ती जा रही है। इस पूरी समस्या के जड़ में जानने की कोशिश की गई तो सभी वर्गों के लोगों का मानना है कि जनसंख्या पर नियंत्रण बिना शिक्षा के संभव नहीं है।
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जिले की एक दशक पहले वर्ष 2001 में जिले की जनसंख्या 2673581 थी जो वर्ष 2011 में 3260699 पहुंच गई। 21.96 प्रतिशत की वृद्धि दर से दस साल में 587118 आबादी बढ़ी है। वर्ष 2016 के अंत तक जिले की संख्या 35 लाख से अधिक पहुंच गई। जनसंख्या वृद्धि में एक पहलू सबसे सुखद है कि जो लिंगानुपात 1000 पर 860 पहुंच गया था उसमें सुधार होकर 910 पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के 15 सीएचसी पर परिवार कल्याण केंद्र बनाकर सुरक्षित परिवार नियोजन के तहत कापॅर-टी, गर्भ निरोधक गोलियां, कंडोम के वितरण के साथ महिला पुरुष नसबंदी जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 11 जुलाई को शहर के ऑडीटोरियम में विश्व जनसंख्या दिवस का मनाया जाएगा। कार्यक्रम में विभाग द्वारा स्टाल लगाकर गर्भ निरोधक गोलियां व कंडोम का वितरण किए जाने के साथ कॉपर-टी लगाई जाएगी। सांसद द्वारा जागरूकता रैली व सारथी रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। यह रथ जिले के सभी 15 ब्लॉकों का भ्रमण करेगा और उसमें एक काउंसलर बैठेगा जो लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करेगा।

आशा बाटेंगी शगुन किट
जिसके घर में नई बहू आई है, उसके घर जाकर क्षेत्र की आशा बहू शगुन किट बहू को देंगी, इस किट में स्वास्थ्य व साफ-सफाई के सामान होंगे, जिसमें गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम, शीशा कंघी, रुमाल और तौलिया होंगी। आशा बहू नवविवाहितों को गर्भधारण में अंतर करने वाले इंजेक्शन और गोलियों के इस्तेमाल की जानकारी देंगी।
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वर्जन-
जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भ निरोधक गोलियां, कापर्टी, कंडोम आदि का एएनएम व आशा बहुओं द्वारा वितरण कराया जा रहा है। समय समय पर नसबंदी कैंप लगाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस पर विभिन्न आयोजन कर लोगों को जागरुक किया जाएगा। सारथी रथ निकालकर काउंसलिंग की जाएगी। - डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ
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