डीएम के आदेश पर भी नहीं मिला प्रवेश
बाराबंकी। अलाभित समूह व दुर्बल वर्ग के परिवार के बच्चों का प्रवेश निजी कांवेंट स्कूलों में कराने के लिए सूची जारी की गई थी। पहले स्कूल संचालकों ने प्रवेश लेने में रुचि नहीं दिखाई। बाद में डीएम के सख्त आदेश के बाद कुछ बच्चों का प्रवेश ले लिया गया। वहीं, जो बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए, उनकी फाइल बीएसए कार्यालय से डीएम को दोबारा प्रेषित की गई है।
शैक्षिक सत्र 2017-18 में आए आवेदनों में से बीएसए कार्यालय से 108 बच्चों की सूची विद्यालय वार जारी की गई थी। पहले तो निजी स्कूल के संचालक प्रवेश लेने में आनाकानी करते रहे। बाद में डीएम अखिलेश तिवारी के सख्त आदेश के बाद प्रवेश शुरू हुआ। 98 बच्चों का प्रवेश बमुश्किल किया गया। शहर के सैनिक पब्लिक स्कूल को 10 बच्चों की सूची भेेजी गई थी, जिसमें से छह बच्चों का प्रवेश लेकर बाकी चार को मना कर दिया गया। मना करने वाले में अंशिका कुमारी, अरुण सिंह, हर्षित कुमार, मो. समीर आदि शामिल थे। बच्चों के अभिभावकों ने इसकी शिकायत डीएम से की। इसके बाद अरुण सिंह व हर्षित को दाखिला मिला और अंशिका व समीर को मना कर दिया गया। शिकायत के बाद दोनों बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर पुस्तकों का पर्चा व प्रवेश शुल्क 600 रुपये जमाकर रसीद दे दी। अंशिका की मां बीना का आरोप है कि जब बच्ची को स्कूल छोड़ने गई तो वहां से नाम न लिखा होने की बात कहते हुए भगा दिया। पीड़िता ने 19 अगस्त को डीएम से शिकायत कर प्रवेश दिलाने की मांग की। बच्ची का प्रवेश न होने से यह सत्र बेकार हो गया। प्रधानाचार्य सैनिक पब्लिक स्कूल चंद्र प्रभा मिश्रा ने कहा कि अंशिका का प्रवेश उम्र कम होने के कारण नहीं हो सका। जिन दस बच्चों की सूची मिली थी, उसमेें से 9 बच्चों का प्रवेश कर लिया गया है।
वर्जन-
सैनिक पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या द्वारा एक बच्ची का प्रवेश नहीं लिया गया। जिसके बारे में जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है। तीन दिन पूर्व अंशिका समेत दस बच्चों के प्रवेश के लिए डीएम कार्यालय फाइल भेजी गई है।
- पीएन सिंह, बीएसए