बाराबंकी। अब तक करीब 29 सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ आफिसर) नौकरी छोड़कर जा चुकी हैं। इस कारण जिले के करीब 150 हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर ताला लटक रहा है। इससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को गांव में ही बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया कराने का दावा भी कागजी साबित हो रहा है। शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी भी सीएचओ की कमी बताकर चुप्पी साध लेते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की जनता को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े इसके लिए सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ वेलनेस सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। जिले में 21 सीएचसी, 57 पीएचसी संचालित हो रही हैं। वहीं 466 हेल्थ वेलनेस सेंटर भी बनाए गए हैं, इनमें से 345 का संचालन शुरू कराया गया था। पर्याप्त संसाधन व सुविधा न मिलने के कारण वर्तमान में संचालन का जिम्मा संभालने वाले 29 से ज्यादा सीएचओ नौकरी छोड़कर जा चुकी हैं। इस कारण मौजूद समय में सिर्फ 316 हेल्थ वेलनेस सेंटरों का ही संचालन हो रहा है जबकि 150 सेंटरों पर ताला पड़ा है।
सेंटरों का संचालन न होने से सेठमऊ, भानपुर, सरायनेतामऊ, बिलौली, गैसापुर, हुसैनाबाद, प्यारेपुर सरैयां, हजरतपुर भटुआमऊ, धधौरी, ररिया, हैदरगंज, सफीपुर सहित अन्य गांव क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए सीएचसी व जिला मुख्यालय से लेकर निजी अस्पतालों तक की दौड़ लगाना पड़ती है। नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. डीके श्रीवास्तव का कहना है कि सीएचओ की कमी के कारण ही करीब 150 हेल्थ वेलनेस सेंटरों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र भी लिखा गया है।