बाराबंकी। ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सड़कों का जाल बिछाए जाने के तमाम दावों के बाद भी जिले के 133 मजरे आज भी सड़क से अछूते हैं। इन मजरों तक कोई सड़क नहीं बन पाई हैं, इससे करीब 40 हजार की आबादी को पथरीले और कच्चे रास्तों से होकर गुजरने की परेशानी उठाना पड़ रही है। अब ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने बिना सड़क वाले मजरों को सूचीबद्ध किया है, ताकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इनको मुख्य मार्गों से जोड़ा जा सके।
जिले में कुल 1155 ग्राम पंचायतों और 1779 राजस्व गांव हैं। इनके अलावा तमाम मजरे भी हैं। शहरों की तरह गांवों में भी नई आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे लोग नई जगहों पर आवास बनाकर रहने लगे हैं। जिले में 133 मजरों को सूचीबद्ध किया गया है, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग नहीं है। मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए करीब 159.09 किलोमीटर सड़क निर्माण की आवश्यकता है। इसके लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 4 के तहत 133 मजरों को शामिल किया है, ताकि यहां सड़कों का निर्माण हो सके।
एक्सईएन आरईएस ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि इसके लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उप्र ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को सूची भेज दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सड़कों के लिए प्रस्ताव तैयार कराकर कार्य भी शुरू करा दिया जाएगा। (संवाद)
सिद्धौर के 53 मजरों में नहीं है सड़क
विकास खंड सिद्धौर के सबसे ज्यादा 53 मजरे सूचीबद्ध किए गए हैं, जहां तक जाने के लिए सड़क नहीं है। इसे अलावा देवा के 20, त्रिवेदीगंज के 12, मसौली व सूरतगंज के 10-10 मजरे शामिल हैं। दरियाबाद का एक, रामनगर, बनीकोडर के तीन-तीन, निंदूरा, हैदरगढ़ के चार-चार, फतेहपुर के दो, पूरेडलई के पांच और हरख के छह मजरे शामिल हैं।