एनजीओ व गेस्ट हाउस संचालक बन गए कोटेदार
बाराबंकी। जिले में कई कोटेदार कुछ बरसों में आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो गए हैं। कोई कोटेदार गेस्ट हाउस चला रहा है तो कोई एनजीओ चलाकर समाजसेवा का दावा कर रहा है। शासन की ओर से कोटेदारों से आय व संपत्ति का ब्यौरा मांगने से संबंधितों में हड़कंप मच गया है।
विभाग को उपलब्ध कराए गए प्रारूप पर कोटेदारों को एक माह के अंदर अपनी आय व संपत्ति का ब्यौरा शपथ पत्र पर देना होगा। विभाग ने सभी कोटेदारों को शासन के निर्देश से अवगत करा दिया है।
जिले के आपूर्ति विभाग द्वारा शहरी व ग्रामीण अंचलों में 1364 कोटे की दुकानें संचालित कराई जा रही हैं। इनसे हर माह साढ़े छह लाख कार्डधारकों को सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराया जाता है।
कोटा पाने से लेकर वर्तमान समय तक कोटेदारों की आर्थिक स्थिति में काफी बढ़ोत्तरी होने पर शासन ने इनकी आय व संपत्ति की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त आलोक कुमार द्वारा जारी आदेश में एक माह के अंदर कोटेदारों का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश विभाग को दिए गए हैं।
कोटेदारों को एक माह के अंदर आय व संपत्ति की पूरी जानकारी शासन द्वारा भेजे गए प्रारूप के माध्यम से शपथ पत्र पर देनी होगी। विभाग ने सभी कोटेदारों को प्रारूप भेज दिया है।
जिला आपूर्ति अधिकारी संतोष विक्रम शाही ने बताया कि, शासन ने कोटेदारों की आय व संपत्ति की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उनसे शपथ पत्र पर आय व संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया है।
जो उन्हें एक माह के अंदर उपलब्ध कराए गए प्रारूप के माध्यम से शपथ पत्र पर देना होगा। इस संबंध में सभी कोटेदारों को निर्देश कर दिया गया है।
कोटा चयन के दौरान कोटेदारों को गोदाम से प्रति माह राशन उठान के लिए शपथ पत्र पर न्यूनतम 40 हजार रुपये आय का स्रोत दिखाना होता है।
कोटेदार बनने पर आपूर्ति विभाग द्वारा अभिलेखों के साथ उसके बैंक खाते का ब्यौरा भी मांगा जाता है। इसमें ये आंकलन किया जाता है कि वह हर माह राशन उठाने में सक्षम है या नहीं। इसके अतिरिक्त अभी तक कोई भी ब्यौरा कोटेदारों से नहीं मांगा गया था।