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अल्ट्रासाउंड सेंटर व निजी अस्पतालों पर रहेगी जासूसों की नजर

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अल्ट्रासाउंड सेंटर व निजी अस्पतालों पर रहेगी जासूसों की नजर
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जिले में 42 अल्ट्रासाउंड सेंटर व 101 निजी अस्पतालों का है पंजीकरण
प्रत्येक माह औसतन 7-8 हजार गर्भवती महिलाओं की होती है जांच
तीन साल में दो अल्ट्रासाउंड पर लिंग जांच करने का हुआ था खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। तीन साल में भले ही अब तक लिंग जांच के दो ही मामले प्रकाश में आए हों, पर यह गोरखधंधा जिले में खूब फल फूल रहा है। आए दिन कहीं कूड़े के ढेर तो कहीं नालों में भ्रूण पड़े मिलते हैं। इन मामलों में जांच के नाम पर खाना पूर्ति की जाती। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने मुखबिर योजना लांच की है। योजना की जानकारी मिलते ही निजी अस्पताल व अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों में खलबली मची हुई है। प्रदेश सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए एक मुखबिर योजना लांच की है। ये मुखबिर जिले में संचालित हो रहे 42 अल्ट्रासाउंड सेंटर व 101 पंजीकृत नर्सिंग होम पर चोरी छिपे नजर रखेंगे। योजना के तहत मुखबिर सीएमओ व जिला प्रशासन को इसकी रिपोर्ट प्रेषित करेंगे। योगी सरकार के योजना के लांच होने की सूचना पर ही निजी अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों में खलबली मची है। सरकारी अस्पताल व निजी अस्पतालों को मिलाकर प्रत्येक माह करीब 7 से 8 हजार गर्भवती महिलाओं की जांचें होती हैं। लिंग की जांच करने के लिए संचालक द्वारा मोटी रकम वसूली जाती है। इसी के चलते भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। अभी हाल में रेलवे स्टेशन के पास कूढ़े में भ्रूण मिलने से स्थानीय लोगों ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। वहीं छह माह पूर्व जमुरिया नाला के पास कुत्ता भ्रूण मुंह में ले जाते देखा गया था। यह दो मामले तो बस नजीर तौर पर हैं, जबकि हकीकत इससे परे है।
इन पर हो चुकी है कार्रवाई
लिंग जांच करने की सूचना पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसकी गोपनीय जांच वर्ष 2012 में लखनऊ की टीम से कराई थी। जिसमें शहर के यश डायग्नोस्टिक सेंटर व सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापेमारी की गई थी। दोनों सेंटरों पर लिंग की जांच करने की पुष्टि होने पर सभी की मशीन सीज कर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो बाद सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर का मामला फाइनल होने के बाद अल्ट्रासाउंड का कार्य शुरू हो गया जबकि यश डायग्नोस्टिक सेंटर अभी बंद है।
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वर्जन-
पहले भी चोरी छिपे अल्ट्रासाउंड सेंटर व निजी अस्पतालों में जांच कर ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। सरकार द्वारा मुखबिर योजना शुरू करने से विभाग को औेर बल मिला है, हालांकि आदेश अभी ओरल हैं, जैसे ही लिखित आदेश मिलता है, इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाएगा।
-डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ

वर्जन-
अभी इस संबंध में मुझे कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। जैसे ही आदेश मिलेगा तत्काल लागू कराया जाएगा।
-अनिल सिंह, एडीएम
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