बाराबंकी। सरकार भले ही परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने के दावे कर रही हो, मगर जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। इसके चलते ही बीते दो वर्षों में बाराबंकी के परिषदीय स्कूलों से 1.12 बच्चों का नामांकन घट गया है। इससे साफ होता है कि शिक्षण कार्य की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर करोड़ खर्च करने के बाद भी अभिभावकों का मोह सरकारी स्कूलों से भंग हो रहा है।
जिले के 2624 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2022-23 में बच्चों की संख्या तीन लाख 94 हजार थी। स्कूलों में बच्चों की संख्या और बढ़ाने व संसाधनों को मजबूत करने के लिए शासन स्तर से कई महत्वाकांक्षी योजना शुरू हुई। जिसके तहत ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को एक-एक विद्यालय गोद दिया गया। उद्देश्य था कि 20 बिंदुओं पर विद्यालयों का समग्र विकास होगा। लेकिन शिक्षा विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि यह योजना पूरी तरह बेअसर साबित हुई।
इस दौरान सत्र 2023-24 में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या घटकर 3.29 लाख पर आ गई। इसके बाद सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को भी बढ़ावा देने की कोशिश की, और बाराबंकी में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया। लेकिन शिक्षकों के विरोध और आवश्यक प्रशिक्षण की कमी के कारण इसका क्रियान्वयन भी नहीं हो सका। इस दौरान सत्र 2024-25 में बच्चों की नामांकन संख्या का आंकड़ा गिर कर 2.82 लाख आ गया।
कस रही नकेल, रोका गया वेतन
बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि कई परिषदीय स्कूलों में बच्चों के नामांकन कार्य को लेकर लापरवाही सामने आई है। जहां नामांकन कम हुआ है या उपस्थिति में काफी गिरावट आई है, वहां संबंधित शिक्षकों का वेतन रोकने के साथ अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा रही है।