खरना अनुष्ठान से महिलाओं ने शुरू किया निर्जल व्रत
बाराबंकी। भगवान भास्कर की उपासना के महापर्व छठ पूजा का हर तरफ उल्लास छाया है। छठ पूजा पर उगते हुए सूर्य के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है।
छठ पूजा की छटा घर से लेकर बाजार तक फैली है। छठ उत्सव का उत्साह खरना अनुष्ठान के साथ बढ़ता जा रहा है। दूरदराज रह रहे परिवारीजन भी घर पहुंच गए हैं। ऐसे में घरों में उत्सव सरीखा माहौल है। बुधवार को व्रती महिलाओं ने गन्ने के रस या गुड़ और साढ़े के चावल से रसियाव बनाया। शाम को भोग लगाकर व्रत रखने वाली महिलाओं ने रसियाव, रोटी व लौकी या कद्दू की सब्जी का स्वल्पाहार लिया और श्रद्धा व आस्था के साथ निर्जल व्रत शुरू किया।
व्रती महिलाओं ने आटा-चावल और गुड़ से पकवान बनाए। चावल व गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू घर ही नहीं आसपास भी फैली रही। बुधवार को महिलाओं ने ठेकुआ, गुड़ और साढ़े के चावल व गन्ने के रस या गुड़ से बनाए गए रसियाव का भोग लगाया। इसमें ठेकुआ (सूर्य की डिजायन के पुए) का विशेष महत्व है। व्रत रखने वाली महिलाओं ने छठ मइया के गीत गाते हुए ठेकुआ, रसियाव आदि बनाया।
रेठ नदी के चिलहटा घाट, नागेश्वरनाथ मंदिर तालाब, पीएसी बटालियन स्थित तालाब व सूत मिल कॉलोनी स्थित अस्थाई तालाब पर श्रद्धालु भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करेंगे। गुरुवार को डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। ज्यादातर व्रती महिलाएं छठ मइया के पारंपरिक गीत गाते अर्घ्य देने के लिए घाट पर पहुंचती हैं।