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Banda News: कोरोना से लड़ने के लिए दुरुस्त करेंगे हथियार

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बांदा। प्रदेश में कोरोना की दस्तक के बाद अब स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। कोरोना से जंग लड़ने के लिए विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग के अधिकारियों की मानें तो ऑक्सीजन प्लांट तो काम कर रहे हैं, अब थर्मल स्कैनर और सैनेटाइजर मशीनों को भी देखा जाएगा। इसके अलावा एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच के लिए आवश्यक उपकरण भी जुटाए जाएंगे, ताकि जांच का दायरा बढ़ाया जा सके।
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कोविड काल में शासन से करोड़ों से संसाधन महकमे को मुहैया कराए गए थे। जिनकी मदद से स्वास्थ विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर सैंपल ले रही थी। इतना ही नहीं रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भी आने जाने वालों की जांच की जा रही थी। कोरोना समाप्त हुआ तो यह संसाधन भी उठाकर कोने में रख दिए गए। अब वे किस हालत में है, काम कर रहे हैं कि नहीं। इसके लिए विभाग एक बार से उनकी सुध लेगा।

वहीं फेज टू में चालू किए गए ऑक्सीजन प्लांटों से गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अधिकारयिं ने बताया कि नरैनी, बबेरू, बहेरी व जसपुरा सीएचसी को एल-1 अस्पताल का दर्जा देकर नरैनी में 50, बबेरू में 20, बहेरी में 20 व जसपुरा में 20 बेड का वार्ड कोविड-19 के लिए आरक्षित किए गए थे। इसी तरह से जिला अस्पताल को एल-2 अस्पताल का दर्जा देकर यहां 21 बेड का आईसीयू व 75 बेड का जनरल वार्ड बनाया गया था। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज को एल-3 अस्पताल का दर्जा देकर 20 बेड आईसीयू, 30 बेड एचडीयू वार्ड को रिजर्व किया गया था। इसके अलावा 100 बेड का जनरल वार्ड बना था। शासन से निर्देश जारी होते ही इन सभी को सक्रिय करने का काम शुरू किया जाएगा।
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कोविड-19 फेज वन व टू में उस समय ऑक्सीजन की सप्लाई सिलिंडरों पर निर्भर थी। बाद में जिला अस्पताल में दो, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में दो व एक सीएचसी नरैनी में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कराया गया था।
वर्तमान में जिला अस्पताल में बने दोनों ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील तो हैं पर मरीज न होने से वे शोपीस ही बने हुए हैं। उधर, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में स्थापित दो ऑक्सीजन प्लांट गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन सप्लाई के लिए क्रियाशील हैं।


28 नवंबर को जनपद में लगे पांचों ऑक्सीजन प्लांट का मॉकड्रिल किया गया था। पांचों प्लांट क्रियाशील मिले हैं। इसके बाद 15 दिसंबर को एल-2 व एल-3 अस्पतालों में आईसीयू बेडों में लगे ऑक्सीजन उपकरणों की जांच की गई थी। जिसमें सब सही पाया गया था। बाकी के संसाधनों को भी जल्द ही देखा जाएगा। ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में तेजी लाई जा सके। फिलहाल जेएन 1 वैरिएंट को लेकर अब तक एक भी केस नहीं मिला है।
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डॉ. प्रसून खरे, कोविड-19 नोडल, बांदा।
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