बांदा। बुंदेलखंड का किसान दस सालों से कभी सूरज की तपिस को कभी बेमौशम बारिश से जूझ रहा है। रविवार को तेज हवाओं व हल्की बारिश से खेतों में पानी भर गया। आसमान को निहार रहे किसान फसलों को सुरक्षित करने की कवायद में खेतों में मशक्कत करते दिखे। फिलहाल बारिश तेज होने से सरसों, अलसी, मसूर की फसल को खासा नुकसान होने की आशंका है। उधर, मौसम की जानकारों के अनुसार दो तीन दिनों तक ऐसा ही मौसम रहने के आसार हैं।
पिछले दस सालों से किसान कुदरत की मार से उबर नहीं पा रहे हैं। कभी सूरज की तपिस तो कभी बेमौसम बारिश और बाढ़ से फसलें बर्बाद हो गईं। इस वर्ष बारिश व ओलावृष्टि न होने से खेतों में रबी की फसल लहलहाती देख किसान बेहद खुश था। लेकिन रविवार को तेज आंधी और बारिश ने उसकी धड़कनों को बढ़ा दिया। सारा दिन किसान कटी फसलों को हवा के झोंकों व बारिश से बचाने की जुगत में लगा रहा। लेकिन कुदरत के आगे वह नाकाम रहा।
महुआ के किसान रामभरोसे का कहना है कि बारिश तेज हुई तो वह किसी लायक नहीं बचेंगे। खेतों में पककर तैयार खड़ी सरसों, अलसी, मसूर, मटर, अरहर सहित गेहूं की फसल को भी खासा नुकसान होगा। जिन किसानों ने फसलों को काटकर खलिहानों में संजोकर रखा वह सड़ जाएगी। गंछा के किसान सियाराम का कहना है कि हम लोग दस सालों से कुदरत के कहर से उबर नहीं पा रहे हैं। पांच साल सूरज की तपिस तो पांच साल बारिश ने रुलाया। इस साल फिर फसलों पर आफत मंडरा रही है।
दो दिन और रहेगा मौसम खराब
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मौसम का मिजाज अभी दो दिन और खराब रहेगा। बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हो सकती है। उधर, कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि बारिश के आसार अधिक हैं ऐसे में किसान फसलों की कटाई बंद कर दें। कटी फसल को सुरक्षित रखें। खड़ी फसल से कटी को ज्यादा नुकसान है।