बांदा। जिले में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता जा रहा है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में खांसी, जुकाम और वायरल फीवर के मरीजों की भरमार है। मंगलवार को जिला पुरुष अस्पताल परिसर में संचालित ट्राॅमा सेंटर वायरल फीवर के मरीजों से फुल हो गया। मजबूरन आई वार्ड में मरीजों को शिफ्ट किया गया, इसके साथ की कई मरीजों को स्ट्रेचर व बेंच पर लिटाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मंगलवार को 1200 से अधिक मरीजों ने उपचार का लाभ लिया।
जिला पुरुष अस्पताल में मंगलवार को मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ज्यादातर मरीज वायरल फीवर और खांसी, जुकाम के पीड़ित रहे। पर्चा काउंटर में पंजीयन कराने के बाद मरीज चिकित्सकों के चेंबर में पहुंचे और उपचार कराया। इसके बाद मरीज दवा वितरण काउंटर पहुंचे और दवा लेने के बाद घर चले गए। ओपीडी बंद होने के बाद ट्राॅमा सेंटर में संचालित इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ पहुंच गई। ईएमओ डॉ. विनीत सचान ने सभी मरीजों का उपचार किया। 12 से अधिक मरीजों को उपचार करने के बाद भर्ती किया गया। ट्राॅमा सेंटर मरीजों से फुल हो जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मरीजों को ट्राॅमा सेंटर के नजदीक स्थित आई वार्ड में शिफ्ट किया गया।
ये मरीज हुए भर्ती
वायरल फीवर से पीड़ित कबरई निवासी राघव (16), बड़ोखर खुर्द निवासी ऋषभ (11), सर्वोदय नगर मोहल्ला निवासी छेद्दी (70), मुसीवां निवासी मालती (30), पुनाहुर निवासी दिनेश (30), पलरा निवासी मीरा (42), कनवारा निवासी गुड़िया (30), झील का पुरवा निवासी पिंकी (38), बबेरू निवासी बच्चा (65), देवरी खन्ना निवासी ज्ञानेंद्र (26), निम्नीपार निवासी मैना (51), अतर्रा निवासी रेखा (40) को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया।
दिन में कम से कम पांच लीटर पानी पीएं
ट्रॉमा सेंटर के ईएमओ डॉ. विनीत सचान ने बताया कि सितंबर माह में मौसम का मिजाज बदल रहा है। कभी गर्म तो कभी ठंडा मौसम होने से लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पसीना अधिक निकल रहा है। डाॅक्टर ने कहा कि धूप से आने के बाद कुछ देर रुकें, फिर पानी पीए। उन्होंने कहा कि एक दिन में कम से कम पांच लीटर पानी व्यक्ति को इस मौसम में पीना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हों। इसके साथ ही बदलते मौसम के प्रति सावधान रहें।