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Banda News: कागजों में ही ऑक्सीजन दे रहे वेंटिलेटर

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बांदा। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। थमे भी तो कैसे, अस्पताल प्रशासन के पास वेंटिलेटर की सुविधा ही नहीं है। कोरोना काल में अस्पताल को मिले छह वेंटिलेटर कहां है, यह जिम्मेदार भी नहीं बता पा रहे हैं। लिहाजा गंभीर मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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बता दें कि करीब एक माह में भीषण गर्मी के दौरान तेज बुखार से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ मरीज वेंटिलेटर की स्थिति में पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल सकी। दूसरी ओर जिला अस्पताल के अधिकारियों का दावा है कि छह वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ न होने से मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दी जा पा रही है।
जिला पुरुष अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डाॅ. आरके गुप्ता का कहना है कि उनके कार्यकाल में वेंटिलेटर नहीं आए थे, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं है। फिर भी वह पता कराएंगे कि वेंटिलेटर कहां हैं। उन्होंने इतना जरूर कहा कि लगभग छह वेंटिलेटर होने चाहिए।
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वेंटिलेटर के लिए चाहिए ये स्टाफ
वेंटिलेटर संचालन के लिए एक चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स, एक ओटी टेक्नीशियन की जरूरत होती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि प्रशिक्षण के लिए नाम स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजे गए थे, लेकिन अभी तक प्रशिक्षण की कोई सुविधा नहीं मिल सकी है। इस कारण वेंटिलेटर का संचालन नहीं हो पा रहा है।


वेंटिलेटर का प्रमुख कार्य
वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है, जो मरीज के फेफड़ों को काम करने में मदद करती है। यदि मरीज को ऐसी कोई बीमारी है, जिससे उसे ठीक से सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वेंटिलेटर जीवन रक्षक का काम करता है। वेंटिलेटर फेफड़ों से हवा को अंदर और बाहर धकेलने में मदद करता है, जिससे शरीर को आवश्यक ऑक्सीजन मिल सके।




0- इन दिक्कतों में पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत
तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस)
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी)

दमा
दिमाग में चोट

दिल की धड़कन रुकना
निमोनिया
-ध्वस्त फेफड़ा
- हार्ट अटैक
- फेफड़ों का संक्रमण
- रक्त में संक्रमण

- ऊपरी रीढ़ की हड्डी की चोटें




कोरोना काल में उपयोगी साबित हुए थे वेंटिलेटर

कोरोना काल में वेंटिलेटर काफी उपयोगी साबित हुए थे। इसे देखते हुए शासन ने सभी जिलों के अस्पतालों को नए वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। कोरोना प्रभावित मरीज के फेफड़े जब तरल पदार्थ से भर जाते थे, और सांस लेना मुश्किल हो जाता था। तब यह मशीन नया जीवन देने का काम करती थी।
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