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Banda News: यूपीएस की बैटरियां खराब, नहीं हो रहा सीटी स्कैन

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बांदा। सीटी मशीन के यूपीएस की 32 बैटरियां खराब हैं। इस कारण एक सप्ताह से जिला अस्पताल में मरीजों का सीटी स्कैन नहीं हो रहा है। इस कारण मरीजों को बाहर से सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि साढ़े पांच लाख की नई बैटरियों की स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही लोगों को सीटी स्कैन की सुविधा मिलने लगेगी।
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करीब एक सप्ताह से जिला अस्पताल आने वाले मरीज सीटी स्कैन के लिए भटक रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन है। ऐसे में मरीज एक रुपये में अस्पताल का पर्चा तो बनवा लेते हैं, लेकिन जब डॉक्टर सीटी स्कैन की जांच उसी पर्चे पर लिख देते हैं तो इलाज की कीमत 2500 तक पहुंच जाती है। प्राइवेट पैथोलॉजी चलाने वाले सीटी स्कैन के 2200 से 2500 रुपये वसूल रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की मानें तो रोजाना 40 से 50 मरीजों को सीटी स्कैन बाहर से कराना पड़ रहा है।

कैसे करा पाएंगी इतनी महंगी जांच
नरैनी से अपने 10 साल के बच्चे का इलाज कराने आईं रमादेवी ने बताया कि उनके पर्चे पर डॉक्टर ने सीटी स्कैन जांच लिख दी है। उनके पास सिर्फ 150 रुपये है, वह कहां से इतनी महंगी जांच करा पाएंगी। बता रहे हैं अभी अस्पताल में सुविधा नहीं है। ऐसे में अब वह कुछ दिन बाद दोबारा आएंगी। अतर्रा से आए बुजुर्ग रामलला का कहना है कि इतना बड़ा अस्पताल है और जांच नहीं हो पा रही है, गरीब मजदूर और किसान कहां से और कैसे इलाज करा पाएंगे।
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इनमें होती है सीटी स्कैन की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक कैंसर और गैर कैंसर युक्त ट्यूमर का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन कराया जाता है। फ्रैक्चर (टूटी हुई हड्डियां), ह्दय से संबंधित बीमारियों और खून के थक्के आदि की महत्वपूर्ण जांच के लिए सीटी स्कैन का सहारा लिया जाता है।

कमिश्नर ने भी जताई थी नाराजगी
मंगलवार को मंडल की बैठक में कमिश्नर बाल कृष्ण त्रिपाठी ने भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सीटी स्कैन की सुविधा को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने जल्द से जल्द सुविधा में सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बाद से ही महकमे में खलबली मची हुई है।

अपर निदेशक स्वास्थ्य (बिजली विभाग) व महानिदेशालय को पत्र लिखा गया था। मांग पत्र के आधार पर साढ़े पांच लाख की स्वीकृति मिल गई है। अनुबंधित संस्था साइरिक्स हेल्थ केयर इस कमी को सही करेगी। प्रयास किया जाएगा कि सप्ताह भीतर तक सुविधा चालू करा दी जाए। -डॉ. एसएन मिश्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।
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