बांदा। बुंदेलखंड में तेजी से गिर रहे भूजल स्तर को बढ़ाने और फसलों की सिंचाई के लिए शुरू की गई खेत-तालाब योजना परवान नहीं चढ़ सकी। किसानों ने योजना के तहत अनुदान तो ले लिया, लेकिन अधिकांश ने आधे-अधूरे तालाब खोदवाए। कई किसानों ने सिर्फ गड्ढा खोदकर खानापूरी कर ली।
अनुदान देने वाले जिम्मेदारों कभी किसी गांव अथवा खेत का निरीक्षण करने के लिए गाड़ियां नहीं दौड़ाई। यही वजह है कि करीब 16 करोड़ खर्च करने के बाद भी न तो जलस्तर बढ़ा और न ही फसलों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हुआ। हां इतना जरूर हुआ कि सरकारी पैसा पाताल में चला गया।
चित्रकूटधाम मंडल में चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में खेत तालाब योजना के तहत चारों जिलों में 2581 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया था। साढ़े 16 करोड़ खर्च होने के बाद भी महज 947 तालाबों में कच्चा व 610 तालाबों में पक्का काम हुआ है। हैरत की बात तो यह है कि एक हजार से अधिक ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्होंने पूरा साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक तालाबों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
खेत तालाब योजना में शासन ने चालू वित्तीय वर्ष में विभाग को 18.08 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। इसमें विभाग ने 16.55 लाख रुपये लाभार्थियों के खातों में डाल दिया। शेष डेढ़ करोड़ रुपये को ठिकाने लगाने के लिए विभागीय अधिकारी लाभार्थियों से साठगांठ करने में लगे हुए है। बताते है कि पिछले 15 दिनों में विभाग ने बिना किसी जांच पड़ताल के एक करोड़ से अधिक रुपये लाभार्थियों के खाते में डाल दिए।
चार्ट-
चित्रकूटधाम मंडल में खेत-तालाब योजना की स्थिति
जनपद लक्ष्य कच्चा पक्का
हमीरपुर 926 419 144
महोबा 521 156 176
बांदा 538 246 259
चित्रकूट 586 126 131
योग- 2581 947 610
चार्ट-
खेत-तालाब योजना में आवंटित धनराशि (लाख में)
जनपद आवंटित व्यय राशि शेष
हमीरपुर 588 518 70
महोबा 389 359 30
बांदा 442 402 40
चित्रकूट 389 374 15
योग- 1808 1655 155
इनसेट-
50 फीसदी मिलता है अनुदान
2013 में खेत-तालाब योजना की शुरुआत की गई थी। योजना के तहत किसान लाभार्थी को खेत में तालाब खोदने के लिए खर्च का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। एक लाख पांच हजार के तालाब में 52500 व दो लाख 28 हजार के तालाब में एक लाख 14 हजार दिए अनुदान दिए जाते हैं।
इनसेट...
जालौन में हुआ था फर्जीवाड़ा
खेत-तालाब योजना में खासा फर्जीवाड़ा होता है। बिना तालाब खुदे लाभार्थी से सांठगाठ कर पैसा दे दिया जाता है। इसके बदले में कमीशन लिए जाने की बात भी सामने आई थी। पिछले वित्तीय वर्ष में जालौन में ऐसे कई मामले सामने आने पर कुछ अफसरों पर कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद भी सांठगांठ का गठजोड़ बदस्तूर जारी है।
इनसेट...
सूख जाते हैंडपंप, तालाबों से उड़ती धूल
समूचे बुंदेलखंड में गर्मी का मौसम आते ही पानी के लिए हाय-तौबा मचने लगती है। अप्रैल से ही पड़ने वाली भीषण गर्मी के चलते मई, जून आते-आते जलस्तर गिरने से ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंप पानी देना बंद कर देते है। इक्का दुक्का हैंडपंपों पर ही भीड़ लगी रहती है। इसी तरह तालाबों से भी धूल उड़ती नजर आती है। इस कारण मवेशियों को भी पानी के लिए भटकना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं से निजात पाने के लिए सरकार ने खेत-तालाब योजना शुरू की थी, लेकिन वह भी लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
इनसेट...
लबालब रहते हैं जखनी और अधांव के तालाब
जिले का एक ऐसा भी गांव जखनी है जहां पर हमेशा तालाब पानी से लबालब रहते है। इससे यहां का जलस्तर बेहतर है। इस गांव का नाम जल ग्राम जखनी रख दिया गया है। जल संरक्षण के इन प्रयासों के लिए समाजसेवी उमाशंकर को पिछले साल भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान दिया था। इसी प्रकार अधांव गांव के तालाबों का पानी कभी खत्म नहीं होता। समाजसेवी रामबाबू के प्रयासों से यहां के जल स्तर में 10 फीट तक इजाफा हुआ है। इसके अलावा लुकतरा में तालाबों का जीर्णोद्धार व जलस्तर बढ़ने की प्रशंसा खुद प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में की थी। यहां भी तालाबों में पानी होने से जलस्तर में सुधार हुआ है।
वर्जन...
लाभार्थी किसानों को तालाब खोदाई करने के लिए चेतावनी दी जाती है। जिन्होंने तालाब खोदाई शुरू नहीं की है, उनकी अनुदान राशि रोकने का फैसला भी किया जा सकता है। -आनंद कुमार तिवारी, उप निदेशक, भूमि संरक्षण, चित्रकूट मंडल, बांदा।