बांदा। ओरन कस्बा व आसपास की करीब तीन लाख की आबादी के बीच कोई सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। इससे यहां के लोगों को बीमारी व हादसे की स्थिति में 30 से 40 किलोमीटर दूर इलाज के लिए जाना पड़ता है। सरकारी अस्पताल न होने से झोलाछाप डाक्टर इसका लाभ उठाते हैं। गांव-गांव व कस्बे में क्लीनिक के नाम पर मरीजों का आर्थिक शोषण करते हैं।
अनुभवहीन डाक्टरों के इलाज से मरीजों के जान पर बन आती है। ओरन नगर पंचायत सहित आसपास के करीब आधा सैकड़ा गांवों के बीच आज तक न तो कोई सरकार अस्पताल खुल पाया है और न ही कोई निजी अच्छा अस्पताल ही है। यदि आकस्मिक हादसा हो जाए तो लोगों को वाहन से लेकर जिला मुख्यालय भागना पड़ता है।
गंभीर बीमारी व प्रसव संबंधी समस्या होने पर अस्पताल पहुंचने के पहले ही मरीज दम तोड़ देते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब चुनाव आता है तो नेता जनता से तरह-तरह के वादे करते हैं, परंतु जीत जाने के बाद कोई पलट कर नहीं देखता। समाजसेवियों ने कई बार शासन को पत्र लिखा, पर यहां एक अदद अस्पताल नहीं खुल सका।