बांदा। शासन बुंदेलखंड के विकास को भले ही तवज्जो दे रहा हो, पर यहां के अधिकारी ही उसकी मंशा पर पानी फेरने में तुले हैं। सिंचाई से लेकर सड़क व अन्य विकास कार्यों के लिए शासन ने अरबों रुपये से जनपद की झोली भरी, पर अधिकारी इसे एक वर्ष में खर्च नहीं कर सके। सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य व खाद्य एवं रसद विभाग के अरबों रुपये आखिर लौट गए। अफसरों ने यह धनराशि खर्च करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। दैवी आपदा पीड़ितों को भी मायूसी हाथ लगी। कुल मिलाकर प्रमुख विभागों के करीब एक अरब 32 करोड़ की धनराशि वापस की गई है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में शासन ने जनपद के विकास के लिए जमकर धनवर्षा की, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते इस धनराशि का उपयोग नहीं हो सका। जनपद में दैवी आपदा से जूझते किसानों की सुविधाओं के लिए शासन ने पिछले वित्तीय वर्ष में 87.55 करोड़ रुपये जारी किए। कृषि विभाग विभिन्न योजनाओं की इस धनराशि में सिर्फ 83.90 लाख रुपये की खर्च कर सका। करीब पौने चार करोड़ रुपये खर्च न होने पाने के कारण वापस हो गए।
खाद्य एवं रसद विभाग की बात करें तो शासन से 1.73 अरब रुपये मिले। विभाग गरीबों के लिए सिर्फ 1.47 अरब रुपये की खर्च कर सका। जबकि 26 करोड़ रुपये वापस चले गए। जनपद की ध्वस्त सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए सरकार ने पीडब्ल्यूडी विभाग को 1.89 अरब रुपये जारी किए थे। इसके सापेक्ष अधिकारी सिर्फ 1.77 अरब ही खर्च पाए। जबकि 12 करोड़ रुपये खर्च न होने के कारण लैप्स हो गए।
जनपद की सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष में 1.11 अरब रुपये जारी किए थे। इसमें अधिकांश पैसा पूरे वर्ष कोषागार में ही पड़ा रहा। विभाग 89 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका। जबकि 21.71 करोड़ रुपये खर्च न होने के कारण वापस हो गए। जनसुविधाओं में रुपये खर्च करने में स्वास्थ्य विभाग भी बेहद फिसड्डी रहा।
एलोपैथिक मद में शासन ने 1.13 अरब रुपये दिए, जिसमें अस्पतालों की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के साथ मरीजों के लिए सुविधाएं व योजनाओं का लाभ दिया जाना था। स्वास्थ्य विभाग इसमें सिर्फ 1.05 अरब ही खर्च कर पाया। वहीं 7.94 करोड़ रुपये बच गए, जिन्हें वापस करना पड़ा। ऐसे ही मेडिकल कालेज के लिए 74.39 करोड़ रुपये मिले। इसमें 66.65 करोड़ रुपये खर्च हो सके। 7.73 करोड़ रुपये की वापसी करनी पड़ी।
परिवार कल्याण विभाग को शासन ने वित्तीय वर्ष में 31 करोड़ रुपये आवंटित किए। इसके सापेक्ष अधिकारी 25.86 करोड़ ही खर्च कर पाया। करीब छह करोड़ रुपये लैप्स हो गए। इसी तरह पुलिस विभाग की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने को शासन ने 2.22 अरब रुपये जारी किए। इसमें पुलिस के आवास से लेकर कार्यालय तक दुरुस्त कराया जाना था। इसमें 1.83 अरब रुपये खर्च किए गए। 39.62 करोड़ रुपये खर्च न हो पाने से वापस करने पड़े। वहीं पंचायतीराज विभाग भी 35 लाख रुपये खर्च नहीं कर पाया। यह धनराशि वापस हो गई।
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शासन से मिली धनराशि व खर्च पर एक नजर
विभाग मिली धनराशि खर्च हुई वापस हुई
कृषि 87.55 83.90 3.65
पंचायतीराज 23.42 23.06 0.35
खाद्य एवं रसद 173.61 147.19 26.42
पुलिस 222.90 183.27 39.62
एलोपैथिक 113.41 105.47 7.94
मेडिकल 74.39 66.65 7.73
परिवार कल्याण 31.03 25.86 5.16
पीडब्ल्यूडी (सड़क) 189.89 177.76 12.13
दैवी आपदा 18.65 11.01 7.64
सिंचाई 111.64 89.92 21.71
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नोट-धनराशि करोड़ रुपये में
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इनसेट
जनपद में इन समस्याओं का अंबार
बांदा। स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो प्राथमिक व सामुदायिक अस्पतालों से लेकर जिला व मंडलीय अस्पतालों में समस्याओं का अंबार है। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है। वहीं, सिंचाई विभाग की बात करें तो जनपद में फैली करीब 1500 किलोमीटर लंबी नहरों में अधिकांश झाड़-झंखाड़ से पटी हैं। इससे टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। लोक निर्माण विभाग भले ही सभी सड़कों के चकाचक होने का दावा कर रहा हो, पर बांदा-बहराइच राजमार्ग इसकी बानगी है. बांदा से चिल्ला तक पूरी सड़क उखड़ी है। इसके अलावा बाईपास भी अभी पूरा नहीं हो सका। जबकि इसका निर्माण डेढ़ दशक से चल रहा है।