बांदा। निजी स्कूलों में पढ़ाई करने और परिषदीय स्कूलों में नाम दर्ज कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के फर्जीवाड़ा के खुलासे के बाद अपर निदेशक बेसिक शिक्षा ने कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के बीएसए को ऐसे बच्चों का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कराने के आदेश दिए हैं।
अमर उजाला के 19 जुलाई के अंक में प्रकाशित खबर ,पढ़ रहे निजी में और ले रहे सरकारी स्कूल की सुविधाएं, को संज्ञान में लेते हुए अपर निदेशक बेसिक अरुण कुमार ने बुधवार को मंडल के बांदा समेत हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट जिले के बेसिक शिक्षाधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है। सभी प्राथमिक स्कूलों में ऐसे बच्चों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस बिंदु पर विशेष ध्यान दें कि इन बच्चों का किन परिस्थितियों में दोहरे शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश लिया गया है। इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कैसी है। ऐसे कितने बच्चों को सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया गया है। इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं। असलियत का पता लगाने के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं। इनका भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी है। यदि किसी निजी शिक्षण संस्था में पढ़ने की वजह से स्कूल नहीं आते तो उनका नाम परिषदीय स्कूल से खारिज कर दिया जाए।
एडी बेसिक अरुण कुमार ने कहा कि दोहरे स्कूलों में प्रवेश के लिए बच्चे जिम्मेदार नहीं हैं। अभिभावक ने किन कारणों से ऐसा किया यह जानना जरूरी है। ऐसे में अभिभावकों व बच्चों पर कोई कार्रवाई करना उचित नहीं है। सिर्फ एक ही विकल्प है कि भौतिक सत्यापन के बाद नियमित स्कूल न आने वाले बच्चों का प्रवेश निरस्त कर दिया जाए।